ग्रेटर नोएडा के गाँव में फिजूलखर्च रोकने के लिए पंचायत की पहल, अब शादी में नहीं बजेगा डीजे, बैठक में फैसला

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ग्रेटर नोएडा के मुर्शदपुर गांव में पंचायत ने शादी समारोहों में डीजे और शराब पर रोक लगाने का फैसला लिया है। साथ ही भात कार्यक्रम में सीमित लोगों की मौजूदगी और फिजूलखर्ची रोकने के लिए कई नई सामाजिक गाइडलाइन जारी की गई हैं।

ग्रेटर नोएडा के मुर्शदपुर गांव में शादी और सामाजिक आयोजनों में बढ़ती फिजूलखर्ची को रोकने के लिए पंचायत ने बड़ा फैसला लिया है। गांव में आयोजित सर्व समाज पंचायत में कई अहम नियम तय किए गए, जिनका पालन सभी ग्रामीणों के लिए अनिवार्य होगा। पंचायत के फैसले के मुताबिक अब गांव में होने वाली शादियों में डीजे नहीं बजाया जाएगा। इसके अलावा भात कार्यक्रम में सीमित संख्या में ही लोग शामिल होंगे और वहां शराब का सेवन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। पंचायत का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य सामाजिक आयोजनों में सादगी लाना और अनावश्यक खर्चों को कम करना है। ग्रामीणों ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा और आर्थिक बोझ कम होगा।


भात और रिसेप्शन से जुड़ी कई परंपराओं में बदलाव

पंचायत में यह भी तय किया गया कि भात कार्यक्रम के बाद बेटी के गांव आने पर टिफिन या अन्य सामान बांटने की परंपरा को बंद किया जाएगा। ग्रामीणों का मानना है कि समय के साथ कई ऐसी परंपराएं जुड़ गई थीं, जिनसे लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ रहा था। इसके साथ ही रिसेप्शन और अन्य आयोजनों में खुले में शराब के टेंट लगाने पर भी पूरी तरह रोक लगा दी गई है। पंचायत सदस्यों का कहना है कि शादी समारोहों में शराब और तेज आवाज में डीजे बजने से कई बार विवाद और अव्यवस्था की स्थिति बन जाती थी। ऐसे में नए नियमों से सामाजिक माहौल बेहतर होने की उम्मीद है।


नियम तोड़ने वालों पर होगी सामाजिक कार्रवाई

पंचायत ने साफ तौर पर कहा है कि गांव का कोई भी व्यक्ति यदि तय नियमों का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ सामाजिक स्तर पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। पंचायत ने सभी ग्रामीणों से सामूहिक रूप से इन फैसलों का पालन करने की अपील की है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पहल सामाजिक सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। इससे पहले ग्रेटर नोएडा के नवादा गांव में भी शादी समारोहों में डीजे बजाने पर प्रतिबंध लगाया गया था। अब मुर्शदपुर गांव का फैसला उसी कड़ी का अगला कदम माना जा रहा है, जहां गांव के लोग मिलकर सामाजिक परंपराओं में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं।

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