दिल्ली हादसे में अब तक छह लोगों की मौत, भरभराकर गिरी थी 5 मंजिला इमारत, मलबे में दबे 14 लोगों का रेस्क्यू

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दिल्ली के सैदुल्लाजाब इमारत हादसे में कई युवाओं की जान चली गई। डॉक्टर, वैज्ञानिक और अधिकारी बनने के सपने देखने वाले इन युवाओं के साथ उनके परिवारों की वर्षों की मेहनत और उम्मीदें भी मलबे में दब गईं।

दक्षिण दिल्ली के सैदुल्लाजाब में सात मंजिला इमारत ढहने की घटना ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। इस हादसे में सिर्फ एक इमारत नहीं गिरी, बल्कि उन युवाओं के सपने भी मलबे में दब गए, जिन्हें उनके परिवारों ने वर्षों की मेहनत, त्याग और संघर्ष से संजोया था। कोई डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहा था, कोई वैज्ञानिक बनने के करीब पहुंच चुका था तो कोई रेलवे अधिकारी बनने का सपना देख रहा था। लेकिन एक पल में सब कुछ खत्म हो गया। हादसे ने कई राज्यों के परिवारों को ऐसा जख्म दिया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा।




वैज्ञानिक बनने से पहले थम गई कपिल की जिंदगी

शनिवार का दिन कपिल के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण दिन था। वह हाल ही में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) में वैज्ञानिक पद के इंटरव्यू से लौटे थे। परिवार और दोस्तों के मुताबिक इंटरव्यू काफी अच्छा हुआ था और चयन की पूरी उम्मीद थी। इसी खुशी में उन्होंने दोस्तों के साथ कैंटीन में पार्टी भी की थी। सभी भविष्य की योजनाओं पर चर्चा कर रहे थे कि तभी इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में कपिल मलबे में दब गए, जबकि उनके कुछ दोस्त बच निकले। घंटों चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। वैज्ञानिक बनने का उनका सपना अधूरा रह गया।




डॉक्टर और अधिकारी बनने की चाह भी रह गई अधूरी

अलवर की रहने वाली एकता बचपन से डॉक्टर बनना चाहती थीं। परिवार ने आर्थिक तंगी के बावजूद उनकी पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए परिवार ने जमीन बेच दी और कर्ज भी लिया। डॉक्टर बनने के बाद वह आगे की तैयारी के लिए दिल्ली आई थीं, लेकिन हादसे ने उनके उज्ज्वल भविष्य को खत्म कर दिया। वहीं बिहार के नवादा निवासी नलिन इंजीनियरिंग पूरी कर भारतीय रेलवे में अधिकारी बनने का सपना लेकर दिल्ली आए थे। परिवार की उम्मीद थी कि नौकरी मिलने के बाद वह घर की आर्थिक स्थिति बदल देंगे। लेकिन रविवार को उनका शव मलबे से निकाला गया और परिवार की सारी उम्मीदें भी टूट गईं।


परिवारों का संघर्ष और उम्मीदें एक झटके में खत्म

उत्तर प्रदेश के गोंडा निवासी रवि भी इस हादसे के शिकार बने। किर्गिस्तान से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह एफएमजीई परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। परिवार ने उनकी पढ़ाई पर करीब 30 लाख रुपये खर्च किए थे और इसके लिए कर्ज भी लिया था। रवि डॉक्टर बनकर परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारना चाहते थे। परीक्षा से कुछ दिन पहले हुए इस हादसे ने उनके सपनों पर हमेशा के लिए विराम लगा दिया। सैदुल्लाजाब की यह त्रासदी केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की वर्षों की मेहनत, उम्मीदों और संघर्ष का दर्दनाक अंत बन गई, जिन्होंने अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सब कुछ दांव पर लगा दिया था।

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