नोएडा जमीन मुआवजा घोटाले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, कोर्ट ने SIT को जांच से हटाया, अब विजिलेंस करेगी जांच, तीन महीने में मांगी रिपोर्ट
- Shiv Kumar
- 13 Jul, 2026
नोएडा में जमीन अधिग्रहण मुआवजा घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) को जांच की जिम्मेदारी से मुक्त करते हुए पूरा मामला उत्तर प्रदेश स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को सौंप दिया है। साथ ही विजिलेंस को निर्देश दिया गया है कि वह तीन महीने के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करे। इस फैसले के बाद बहुचर्चित मुआवजा घोटाले की जांच अब नए चरण में प्रवेश करेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनाया। मामला नोएडा प्राधिकरण के एक लॉ ऑफिसर समेत कुछ अधिकारियों और भू-स्वामियों को नियमों से अधिक मुआवजा दिए जाने के आरोपों से संबंधित है। जांच के दौरान अधिकारियों की भूमिका और कथित अनियमितताओं को लेकर कई गंभीर सवाल सामने आए थे।
SIT ने कोर्ट में दाखिल की अंतिम रिपोर्ट
सुनवाई के दौरान एसआईटी ने अपनी अंतिम स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में पेश की। रिपोर्ट के अनुसार अब तक इस मामले में कुल छह एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें तीन मामले अधिकारियों और अन्य लोगों की कथित मिलीभगत से जुड़े हैं, जबकि तीन एफआईआर आय से अधिक संपत्ति के मामलों में दर्ज की गई हैं। जांच में यह आरोप भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों ने किसानों का मुआवजा बढ़वाने के नाम पर अवैध वसूली की। इन तथ्यों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने आगे की जांच स्टेट विजिलेंस ब्यूरो से कराने का अनुरोध किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।
विजिलेंस को सौंपा जाएगा पूरा रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि एसआईटी अपने पास मौजूद सभी दस्तावेज, साक्ष्य और जांच रिकॉर्ड स्टेट विजिलेंस ब्यूरो को सौंपे। अदालत ने स्पष्ट किया कि विजिलेंस निर्धारित समय सीमा के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट दाखिल करे। यदि जांच या आगे की कार्रवाई में अनावश्यक देरी होती है तो प्रभावित पक्ष या कोई भी जनहित में हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। सुनवाई के दौरान पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) से जुड़े एक अन्य मुद्दे पर भी अदालत ने स्पष्ट किया कि बिना पर्यावरण मंजूरी के परियोजनाओं पर रोक का आदेश केवल उन्हीं परियोजनाओं पर लागू होगा, जिनके लिए ईआईए रिपोर्ट के आधार पर पर्यावरण स्वीकृति अनिवार्य है। अधिसूचना के तहत छूट प्राप्त परियोजनाओं को निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। फिलहाल अदालत ने किसानों को पहले से मिली अंतरिम सुरक्षा को बरकरार रखा है। अब पूरे मामले की जांच की जिम्मेदारी स्टेट विजिलेंस ब्यूरो के पास होगी, जिससे आने वाले महीनों में घोटाले से जुड़े नए तथ्य सामने आने की संभावना है।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






