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नोएडा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बुजुर्ग से 22 लाख की साइबर ठगी, मुंबई साइबर पुलिस अधिकारी बनकर किया शिकार

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नोएडा के सेक्टर-37 निवासी बुजुर्ग से डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर 22 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई। ठगों ने खुद को मुंबई साइबर पुलिस का अधिकारी बताकर मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी में फंसाने की धमकी दी। पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

नोएडा में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। सेक्टर-37 निवासी एक बुजुर्ग को खुद को मुंबई साइबर पुलिस का अधिकारी बताने वाले ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी के मामले में फंसाने का डर दिखाकर 22 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने बुजुर्ग को लगातार मानसिक दबाव में रखा और उन्हें विश्वास दिलाया कि उनके खिलाफ गंभीर आपराधिक जांच चल रही है। डर और घबराहट में आकर पीड़ित ने ठगों के बताए खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।


मुंबई साइबर पुलिस का अधिकारी बनकर बनाया शिकार

पीड़ित के अनुसार, ठगों ने खुद को मुंबई साइबर पुलिस का अधिकारी बताते हुए संपर्क किया। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित का नाम मनी लॉन्ड्रिंग और मानव तस्करी जैसे गंभीर मामलों में सामने आया है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर उन्हें कथित जांच के नाम पर लगातार फोन और ऑनलाइन संपर्क में रखा गया। इसी दौरान ठगों ने अलग-अलग बहानों से 22 लाख रुपये अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़ित मानसिक दबाव में रहे और ठगों के झांसे में आ गए।


केस दर्ज, साइबर पुलिस ने शुरू की जांच

ठगी का एहसास होने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर क्राइम थाने में दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रांजैक्शन की जांच कर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि कोई भी सरकारी एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए "डिजिटल अरेस्ट" नहीं करती। यदि इस तरह की कोई कॉल आए तो घबराने के बजाय तुरंत कॉल काटकर संबंधित एजेंसी या साइबर हेल्पलाइन पर इसकी सूचना दें।

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