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नोएडा में 100 करोड़ के मुआवजा घोटाले की विजिलेंस जांच शुरू, अधिकारियों पर 10 प्रतिशत कमीशन का आरोप, अब 6 FIR का रिकॉर्ड खंगाला जाएगा

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नोएडा में जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को दिए गए 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित अतिरिक्त मुआवजा घोटाले की जांच अब विजिलेंस ने शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद छह एफआईआर से जुड़े दस्तावेज, मुआवजा रिकॉर्ड और अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

नोएडा में जमीन अधिग्रहण के दौरान किसानों को दिए गए अतिरिक्त मुआवजे से जुड़े 100 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले की जांच अब विजिलेंस इकाई ने शुरू कर दी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार की विजिलेंस इकाई ने मामले से जुड़े दस्तावेज जुटाने शुरू कर दिए हैं। इससे पहले इस पूरे मामले की जांच शासन स्तर से गठित विशेष जांच दल कर रहा था। जांच के दौरान विशेष जांच दल ने छह मुकदमे दर्ज कराए थे। इनमें तीन मामले किसानों को कथित तौर पर नियमों से अधिक मुआवजा दिलाने और रकम हड़पने से जुड़े हैं, जबकि तीन मुकदमे नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में दर्ज किए गए हैं। अब विजिलेंस इन सभी मामलों में जुटाए गए दस्तावेज और साक्ष्यों की दोबारा पड़ताल करेगी।


छह मुकदमों से जुड़े दस्तावेज जांच के दायरे में

विजिलेंस ने विशेष जांच दल की ओर से दर्ज कराई गई छह एफआईआर से जुड़े दस्तावेज अपने जांच के दायरे में लिए हैं। एफआईआर में नामजद लोगों की भूमिका, प्राधिकरण से उनके संबंध और मामले में उनके स्तर से किए गए काम की जानकारी जुटाई जा रही है। इसके लिए प्राधिकरण से संबंधित रिकॉर्ड मांगे गए हैं। साथ ही उन अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी भी ली जा रही है, जिनकी जमीन अधिग्रहण, मुआवजा तय करने या भुगतान की प्रक्रिया में भूमिका रही थी। जांच में संबंधित फाइलों के साथ अधिकारियों की हस्ताक्षर करने की अधिकार सीमा का रिकॉर्ड भी देखा जाएगा। इससे यह पता लगाने की कोशिश होगी कि किस अधिकारी के पास किस तरह के फैसले लेने का अधिकार था और किस स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ी।


अतिरिक्त मुआवजे के बदले 10 प्रतिशत कमीशन का आरोप

विशेष जांच दल की जांच में यह आरोप भी सामने आया था कि किसानों को अतिरिक्त मुआवजा दिलाने के बदले प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों ने कथित तौर पर 10 प्रतिशत तक नकद कमीशन लिया। विशेष जांच दल ने इस लेन-देन से जुड़ी जानकारी अपनी रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के सामने भी रखी थी। जांच के दौरान ऐसे मामले भी सामने आने की बात कही गई, जिनमें किसानों को निर्धारित रकम से काफी अधिक मुआवजा दिया गया। अब विजिलेंस इस पूरे लेन-देन की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच में यह देखा जाएगा कि अतिरिक्त मुआवजे का आधार क्या था, किस अधिकारी ने फाइल आगे बढ़ाई और किस स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई।


प्राधिकरण से मांगी जा रही फाइल और भुगतान की पूरी जानकारी

विजिलेंस ने प्राधिकरण से जमीन अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा है। इनमें फाइलें, नोटशीट, आदेश, मुआवजा निर्धारण से जुड़े दस्तावेज और भुगतान का रिकॉर्ड शामिल है। अधिकारियों के हस्ताक्षर और उनके अधिकार क्षेत्र से संबंधित जानकारी भी जांच का हिस्सा होगी। इसके अलावा एफआईआर में नामजद लोगों का प्राधिकरण से क्या संबंध था और किस अधिकारी के स्तर से कौन सा आदेश जारी किया गया, इसकी भी पड़ताल की जाएगी। खास तौर पर यह देखा जाएगा कि भुगतान किस अधिकारी के हस्ताक्षर से आगे बढ़ा और संबंधित प्रक्रिया में नियमों का पालन हुआ या नहीं। जांच आगे बढ़ने के साथ मामले में जिम्मेदार लोगों की भूमिका और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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