श्रमिक हिंसा केस में योगेश मीणा-सृष्टि गुप्ता को जमानत, 11 मुकदमों के कारण फिलहाल जेल से नहीं हो सकेगी रिहाई
- Shiv Kumar
- 14 Aug, 2026
नोएडा के सेक्टर-84 में हुई श्रमिक हिंसा से जुड़े मामलों में योगेश मीणा और सृष्टि गुप्ता को अदालत से जमानत मिल गई है। अपर सत्र न्यायाधीश सोमप्रभा मिश्र की अदालत ने दोनों के खिलाफ आपराधिक इतिहास नहीं होने और मामले में उनकी सक्रिय भूमिका स्पष्ट नहीं होने को राहत का आधार माना। हालांकि, दोनों के खिलाफ अलग-अलग थानों में 11 अन्य मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण फिलहाल दोनों की जेल से रिहाई नहीं हो सकेगी।
वेतन बढ़ाने की मांग के बाद हिंसा में बदला था आंदोलन
फेज-2 कोतवाली में दर्ज अपराध संख्या 165 में योगेश मीणा को जमानत मिली है। बचाव पक्ष के मुताबिक, 13 अप्रैल को सेक्टर-84 स्थित मदरसन फैक्ट्री के पास वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर श्रमिक आंदोलन चल रहा था। आरोप है कि बाद में प्रदर्शन हिंसा में बदल गया और इस दौरान तोड़फोड़, आगजनी के साथ पुलिसकर्मियों और फैक्ट्री कर्मचारियों पर हमला किया गया। बचाव पक्ष ने कहा कि शुरुआती मुकदमे में योगेश का नाम नहीं था और घटना के समय वह मौके पर भी मौजूद नहीं था।
केस डायरी और वाट्सऐप चैट भी देखी गई
जमानत पर सुनवाई के दौरान अदालत ने केस डायरी के साथ रिचा ग्लोबल के वाट्सऐप चैट का भी अवलोकन किया। अदालत के सामने आंदोलन के शांतिपूर्ण प्रदर्शन से हिंसा में बदलने से जुड़े तथ्य रखे गए। बचाव पक्ष ने योगेश के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने का भी हवाला दिया। बताया गया कि योगेश को 30 मई को गिरफ्तार किया गया था और वह 20 जून से जेल में बंद है। अदालत ने उपलब्ध तथ्यों को देखते हुए संबंधित मामले में उसकी जमानत मंजूर कर दी।
सृष्टि की गिरफ्तारी घटना से पहले हुई थी
फेज-3 कोतवाली के अपराध संख्या 151 में सृष्टि गुप्ता को भी जमानत मिली है। यह मामला सेक्टर-64, 65, 67, 68 और 69 में श्रमिक हिंसा, यातायात बाधित करने, फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ और मारपीट के आरोपों से जुड़ा है। बचाव पक्ष ने बताया कि सृष्टि को 11 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था, जबकि संबंधित घटना 13 अप्रैल की थी। यह भी तर्क दिया गया कि पूर्व की एफआईआर में उसका नाम नहीं था।
षड्यंत्र के आरोप के बावजूद अदालत ने दी राहत
अभियोजन पक्ष ने सृष्टि की जमानत का विरोध करते हुए उस पर दुष्प्रेरण और षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप लगाया। हालांकि अदालत ने चार्जशीट में घटना के दौरान उसकी सक्रिय संलिप्तता स्पष्ट नहीं होने और कोई आपराधिक इतिहास नहीं होने को महत्वपूर्ण माना। इन परिस्थितियों के आधार पर अदालत ने सृष्टि को सशर्त जमानत दे दी। हालांकि, इस राहत के बावजूद दूसरे मुकदमों के कारण उसकी तत्काल रिहाई संभव नहीं होगी। योगेश मीणा और सृष्टि गुप्ता के खिलाफ अलग-अलग कोतवाली में कुल 11 अन्य मुकदमे दर्ज हैं। इन मामलों में जमानत नहीं मिलने के कारण दोनों फिलहाल जेल में ही रहेंगे। यानी श्रमिक हिंसा के इन मामलों में अदालत से राहत मिलने के बावजूद दूसरे मुकदमों की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक दोनों को जेल से बाहर आने का रास्ता साफ नहीं हुआ है।
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