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नोएडा में सरकारी अफसर बनकर दो महिलाओं से 43.91 लाख की साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग का दिखाया डर

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नोएडा में साइबर ठगों ने सरकारी अधिकारी बनकर दो महिलाओं को जांच, गिरफ्तारी और मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया। दोनों मामलों में महिलाओं से कुल 43.91 लाख रुपये ठग लिए गए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन की जांच शुरू कर दी है।

नोएडा में साइबर ठगी के दो मामलों ने एक बार फिर लोगों को सावधान रहने की जरूरत बता दी है। साइबर ठगों ने सरकारी जांच और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में फंसाने का डर दिखाकर दो महिलाओं से कुल 43.91 लाख रुपये ठग लिए। एक मामले में आरोपी ने खुद को दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बताया, जबकि दूसरे मामले में ठग ने मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर महिला को डराया। दोनों घटनाओं में आरोपियों ने गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर पीड़िताओं को मानसिक दबाव में लिया और फिर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर कराई। दोनों महिलाओं ने शनिवार को साइबर क्राइम थाने में शिकायत दी, जिसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बनकर महिला को किया डिजिटल अरेस्ट

बिसरख निवासी अनीता श्रीवास्तव के मोबाइल पर 5 अक्टूबर 2025 को एक व्यक्ति का फोन आया था। आरोपी ने खुद को दूरसंचार विभाग का कर्मचारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से जुड़ा एक मोबाइल नंबर साइबर अपराध में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद महिला को मोबाइल बंद कराने और गिरफ्तारी की बात कहकर डराया गया। आरोप है कि ठग वीडियो कॉल के जरिए लगातार महिला पर नजर रखता रहा और उसे तीन दिन तक डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक दबाव में रखा। इसके बाद महिला को एक खाते में पैसे भेजने के लिए कहा गया। डर के चलते अनीता ने 7 अक्टूबर को अपने बैंक खाते से 24 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। रकम भेजने के बाद ठगों ने पैसे वापस करने का भरोसा दिया, लेकिन रकम वापस नहीं मिली।


मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बनकर 19.91 लाख की ठगी

दूसरी घटना सेक्टर-29 स्थित ब्रह्मपुत्र अपार्टमेंट की रहने वाली महिला के साथ हुई। महिला के पास 6 अगस्त को एक व्यक्ति का फोन आया। उसने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया और महिला पर करोड़ों रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया। इसके बाद आरोपी ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर अलग-अलग बैंक खातों में रकम भेजने के लिए मजबूर किया। महिला ने आरटीजीएस और यूपीआई के जरिए पांच बार में कुल 19.91 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने उनसे पैन कार्ड और आधार कार्ड की तस्वीरें भी हासिल कर लीं। बाद में जब महिला को ठगी का एहसास हुआ तो उन्होंने राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई।


बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच में जुटी पुलिस

दोनों शिकायतों के आधार पर पुलिस ने मामले दर्ज कर लिए हैं। अब जांच टीम उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और लेनदेन की जानकारी जुटा रही है, जिनका इस्तेमाल ठगी के दौरान किया गया। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि दोनों मामलों के पीछे एक ही गिरोह है या अलग-अलग साइबर ठग सक्रिय हैं। ऐसे मामलों में पुलिस लगातार लोगों को आगाह करती रही है कि कोई भी सरकारी अधिकारी फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करने के लिए नहीं कहता। अनजान कॉल पर व्यक्तिगत दस्तावेज और बैंक से जुड़ी जानकारी साझा करने से बचना जरूरी है।

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