नोएडा PGICH में बच्चों की आनुवंशिक बीमारियों की जांच होगी आसान, 6 नई जेनेटिक टेस्ट को मिली मंजूरी
- Shiv Kumar
- 20 Aug, 2026
नोएडा के पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ में बच्चों से जुड़ी आनुवंशिक बीमारियों की जांच अब पहले के मुकाबले आसान होने वाली है। संस्थान के मेडिकल जेनेटिक्स विभाग को छह नई आनुवंशिक जांच शुरू करने की मंजूरी मिल गई है। जल्द ही इन जांचों के लिए नमूने लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसका सीधा फायदा उन बच्चों और परिवारों को मिलेगा, जिन्हें आनुवंशिक बीमारी की आशंका में जांच के लिए दूसरे संस्थानों या निजी प्रयोगशालाओं का रुख करना पड़ता था। नई सुविधाएं शुरू होने के बाद संस्थान में ही कई महत्वपूर्ण बीमारियों की पहचान की जा सकेगी। डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर बीमारी का पता चलने से आगे के इलाज और परिवार की चिकित्सकीय सलाह को बेहतर तरीके से तय करने में मदद मिल सकती है।
इन छह जांचों की मिली मंजूरी
मेडिकल जेनेटिक्स विभाग में जिन नई जांचों को मंजूरी मिली है, उनमें फ्रैजाइल एक्स सिंड्रोम, सिस्टिक फाइब्रोसिस के लिए ΔF508 म्यूटेशन, फैक्टर V लीडेन म्यूटेशन, गिल्बर्ट सिंड्रोम के लिए UGT1A1 प्रमोटर जांच, MECP2 हॉटस्पॉट सीक्वेंसिंग और अकोंड्रोप्लासिया शामिल हैं। इन जांचों का इस्तेमाल अलग-अलग आनुवंशिक बीमारियों की पहचान में किया जाएगा। विभाग में पहले से भी कई जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं। इनमें टार्गेटेड सैंजर सीक्वेंसिंग, एनीयूप्लॉइडी की पहचान के लिए क्यूएफ-पीसीआर के साथ थैलेसीमिया और स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी की आनुवंशिक जांच शामिल है। नई जांचें शुरू होने के बाद विभाग की क्षमता और बढ़ जाएगी।
गंभीर बीमारियों की पहचान में मिलेगी मदद
नई जांचों से बच्चों में कई गंभीर आनुवंशिक और विकास संबंधी समस्याओं की पहचान में मदद मिलेगी। विभाग के वैज्ञानिक डॉ. दिनेश कुमार साहू के मुताबिक, फ्रैजाइल एक्स सिंड्रोम बौद्धिक अक्षमता और ऑटिज्म से जुड़े प्रमुख आनुवंशिक कारणों में शामिल है। MECP2 जीन की जांच रेट सिंड्रोम समेत कुछ न्यूरो-विकास संबंधी विकारों को समझने में उपयोगी है। इसी तरह सिस्टिक फाइब्रोसिस में ΔF508 म्यूटेशन की जांच संदिग्ध मरीजों के आणविक निदान में मदद करेगी। अकोंड्रोप्लासिया की जांच छोटे कद और हड्डियों के विकास से जुड़े विकारों की पहचान में उपयोगी होगी। वहीं UGT1A1 जांच आनुवंशिक कारणों से होने वाले पीलिया और फैक्टर V लीडेन जांच खून में असामान्य थक्के बनने की आनुवंशिक प्रवृत्ति का पता लगाने में मदद करेगी।
कम समय और खर्च में मिल सकेगी जांच की सुविधा
मेडिकल जेनेटिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. मयंक निलय ने बताया कि संस्थान के भीतर जांच सुविधाओं का विस्तार बच्चों और उनके परिवारों के लिए अहम कदम है। इससे जांच के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी और अपेक्षाकृत कम खर्च में समय पर आनुवंशिक निदान मिल सकेगा। संस्थान के निदेशक डॉ. एके. सिंह ने भी विभाग के प्रयासों की सराहना की है। उनका कहना है कि आनुवंशिक जांच की सुविधाएं लगातार बढ़ने से बच्चों की बीमारी को समय रहते समझने और परिवारों को बेहतर चिकित्सकीय सलाह देने में मदद मिलेगी। इससे गंभीर मामलों में आगे की उपचार प्रक्रिया तय करना भी आसान हो सकेगा।
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