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प्राइवेट लोन ऐप से ठगी का मामला, नोएडा में 6 आरोपी गिरफ्तार, एडिट की गई फोटो भेजकर करते थे ब्लैकमेल

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नोएडा के सेक्टर-141 से साइबर क्राइम पुलिस ने प्राइवेट लोन ऐप के जरिए ठगी और मॉर्फ न्यूड फोटो से ब्लैकमेल करने वाले छह आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस को करीब 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी के सुराग मिले हैं। आरोपियों से मोबाइल, एटीएम कार्ड, पासबुक और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद हुए हैं।

नोएडा में साइबर क्राइम पुलिस ने प्राइवेट लोन ऐप के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बनाने और मॉर्फ की गई अश्लील तस्वीरें भेजकर ब्लैकमेल करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने सेक्टर-141 से छह साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह के सदस्य प्राइवेट लोन ऐप से लोन लेने वाले लोगों को वीडियो कॉल करते थे और इसके बाद अलग-अलग तरीकों से उन्हें अपने जाल में फंसाते थे। UPI और QR कोड के जरिए पीड़ितों के खातों से रकम ट्रांसफर कराई जाती थी। इसके अलावा एडिट की गई न्यूड तस्वीरें भेजकर पैसे की मांग की जाती थी। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, पासबुक समेत अन्य सामान बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, गिरोह ने अब तक करीब 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी की है।


लोन लेने वालों को वीडियो कॉल कर बनाते थे निशाना

पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी प्राइवेट लोन ऐप के जरिए लोन लेने वाले लोगों की जानकारी हासिल करते थे। इसके बाद उनसे वीडियो कॉल के माध्यम से संपर्क किया जाता था। बातचीत के दौरान पीड़ितों को विश्वास में लेने के बाद उनके साथ साइबर ठगी की जाती थी। आरोपियों पर UPI और QR कोड के माध्यम से अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराने का आरोप है। इसके साथ ही गिरोह के सदस्य पीड़ितों की तस्वीरों को मॉर्फ या एडिट कर आपत्तिजनक रूप देते थे। बाद में इन तस्वीरों को भेजकर ब्लैकमेल किया जाता था। पुलिस का कहना है कि इस तरीके से आरोपी पीड़ितों पर दबाव बनाकर रकम वसूलने की कोशिश करते थे।


WhatsApp और Telegram से जुटाए डिजिटल साक्ष्य

गिरफ्तार आरोपियों के पास से पुलिस को कई डिजिटल साक्ष्य भी मिले हैं। जांच के दौरान WhatsApp, Telegram और Binance App से जुड़े डिजिटल प्रमाण बरामद किए गए हैं। पुलिस को USDT के माध्यम से रकम के लेन-देन के भी सबूत मिले हैं। इससे जांचकर्ताओं को गिरोह के पैसों के लेन-देन और डिजिटल नेटवर्क को समझने में मदद मिल रही है। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और उनके संपर्कों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी से प्राप्त रकम को किन खातों और डिजिटल माध्यमों के जरिए आगे भेजा जाता था।


चार राज्यों में दर्ज शिकायतों से जुड़ रहे तार

पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल यानी NCRP पर उत्तर प्रदेश, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र से जुड़ी पांच शिकायतें दर्ज हैं। इन शिकायतों के आधार पर पुलिस ने आरोपियों की गतिविधियों की पड़ताल की। जांच में सामने आया कि गिरोह का नेटवर्क अलग-अलग राज्यों में रहने वाले लोगों तक पहुंच बना रहा था। अब तक करीब 25 लाख रुपये की धोखाधड़ी किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, पुलिस जांच आगे बढ़ने के साथ ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की संख्या में बदलाव हो सकता है। पुलिस बरामद डिजिटल उपकरणों और बैंकिंग रिकॉर्ड की मदद से पूरे नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है।


मोबाइल और बैंकिंग दस्तावेज समेत सामान बरामद

साइबर क्राइम पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल फोन, चार ATM/डेबिट कार्ड, दो पासबुक, दो ड्राइविंग लाइसेंस और 810 रुपये नकद बरामद किए हैं। बरामद सामान की जांच के जरिए पुलिस गिरोह की गतिविधियों से जुड़े और साक्ष्य जुटा रही है। पुलिस यह पता लगाने में भी जुटी है कि बरामद बैंकिंग दस्तावेज किन खातों से जुड़े हैं और इनका इस्तेमाल किस तरह किया जाता था। अधिकारियों के मुताबिक, डिजिटल साक्ष्यों की जांच के बाद मामले में और लोगों की भूमिका सामने आ सकती है। पुलिस ने लोगों से साइबर ठगी के ऐसे मामलों में सतर्क रहने और अनजान लोगों को निजी फोटो, बैंकिंग जानकारी या OTP साझा न करने की अपील की है।

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