गौतमबुद्धनगर में अब AI रखेगा ट्रैफिक जाम पर नजर, 11 हॉटस्पॉट पर तय समय से ज्यादा वाहन फंसे तो मिलेगा अलर्ट
- Shiv Kumar
- 02 Sep, 2026
गौतमबुद्धनगर में ट्रैफिक जाम की समस्या से निपटने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। ट्रैफिक पुलिस ने जिले के 11 ऐसे स्थान चिह्नित किए हैं, जहां अक्सर वाहनों की रफ्तार थम जाती है। इन स्थानों पर वाहन तय समय से ज्यादा देर तक फंसे तो कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित व्यवस्था तुरंत सूचना देगी। सूचना मिलते ही लाल चेतावनी जारी होगी और ट्रैफिक पुलिस मौके पर पहुंचकर जाम की वजह तलाशेगी। अगस्त के आंकड़ों में छह प्रमुख मार्गों पर 254 बार जाम की स्थिति सामने आई। अब पुलिस इन आंकड़ों के आधार पर जाम वाले स्थानों पर स्थायी सुधार की दिशा में काम कर रही है।
छह प्रमुख मार्गों पर 254 बार बनी जाम की स्थिति
ट्रैफिक डीसीपी अभय कुमार मिश्र के मुताबिक, 31 अगस्त को हुई बैठक में जिले के प्रमुख मार्गों पर जाम की स्थिति की समीक्षा की गई। इसमें अलग-अलग मार्गों पर लगने वाले समय और जाम से जुड़े आंकड़ों को देखा गया। अगस्त में छह प्रमुख मार्गों पर कुल 254 बार जाम की सूचना मिली। चिल्ला बॉर्डर बस स्टैंड से सेक्टर-137 एडवेंट तक करीब 13.95 किलोमीटर लंबे मार्ग पर 43 मिनट से ज्यादा समय लगने पर इसे जाम की स्थिति माना जाएगा। इसी तरह तिगरी गोल चक्कर से बिसरख हनुमान मंदिर गोल चक्कर वाले मार्ग पर अगस्त में सबसे ज्यादा 100 बार जाम दर्ज हुआ। होंडा सील चौक से खरली नहर पुल मार्ग पर 75 बार और एसजेएम अस्पताल तिराहे से सेक्टर-112 कट वाले मार्ग पर 44 बार जाम की स्थिति बनी।
एआई अलर्ट मिलते ही मौके पर पहुंचेगी पुलिस
नई व्यवस्था में चिह्नित 11 जाम वाले स्थानों पर वाहनों की गति और यात्रा समय पर नजर रखी जाएगी। अगर किसी मार्ग पर वाहन सामान्य से ज्यादा समय तक फंसे रहते हैं तो व्यवस्था इसकी जानकारी देगी। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर यह पता लगाएगी कि जाम की असली वजह क्या है। इसके पीछे सड़क पर गलत तरीके से खड़े वाहन, ई-रिक्शा, अतिक्रमण, यातायात नियमों का उल्लंघन या सड़क की बनावट जैसी वजहें हो सकती हैं। पुलिस का मकसद सिर्फ जाम लगने के बाद रास्ता खुलवाना नहीं, बल्कि बार-बार जाम की वजह बनने वाली समस्याओं को दूर करना है।
ई-रिक्शा के लिए तय होगी एक लेन
जाम कम करने के लिए ट्रैफिक पुलिस पांच स्तरों पर काम करेगी। इसमें सड़क व्यवस्था में सुधार, नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई, ई-रिक्शा का बेहतर संचालन, लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करना और अतिक्रमण हटाना शामिल है। ई-रिक्शा को व्यवस्थित करने के लिए उन्हें एक निर्धारित लेन में खड़ा कराने की योजना पर भी काम शुरू हो गया है। सेक्टर-35 और सेक्टर-37 में ई-रिक्शा चालकों को एक लेन में खड़ा कराया जाने लगा है। पुलिस का मानना है कि अगर सड़क किनारे वाहनों और ई-रिक्शा की बेतरतीब पार्किंग पर रोक लगती है तो यातायात की रफ्तार काफी हद तक सुधर सकती है।
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