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नोएडा में 217 करोड़ की ‘सेफ सिटी’ परियोजना शुरू, 2, 200 नए कैमरों से होगी निगरानी, 20 हजार CCTV भी जुड़ेंगे नेटवर्क से

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नोएडा में 217 करोड़ रुपये की सेफ सिटी परियोजना के तहत 2,200 नए निगरानी कैमरे लगाए जाएंगे। इन्हें 20 हजार से अधिक मौजूदा सीसीटीवी कैमरों से जोड़कर एकीकृत नेटवर्क बनाया जाएगा। सेक्टर-94 का नया नियंत्रण कक्ष पुलिस मुख्यालय से जुड़कर संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई में मदद करेगा।

हाईटेक सिटी नोएडा में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने 217 करोड़ रुपये की सेफ सिटी परियोजना शुरू करने की तैयारी तेज कर दी है। इस योजना के तहत शहर में 2,200 अत्याधुनिक निगरानी कैमरे लगाए जाएंगे। खास बात यह है कि इन नए कैमरों को शहर में पहले से लगे 20 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इससे आवासीय सोसायटियों, निजी मकानों, दुकानों, अस्पतालों, स्कूल-कॉलेज, धार्मिक स्थलों, मॉल, बाजार और औद्योगिक व व्यावसायिक संस्थानों की निगरानी व्यवस्था को एक बड़े नेटवर्क में शामिल किया जा सकेगा। इसका मकसद संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस तक तेजी से पहुंचाना और किसी घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है।


217 करोड़ की परियोजना पर तेज हुई तैयारी

नोएडा प्राधिकरण ने सेफ सिटी परियोजना के लिए निविदा प्रस्ताव जारी कर दिया है। इसके बाद करीब 10 दिन में कंपनियों के साथ पूर्व-निविदा बैठक आयोजित की जाएगी। प्राधिकरण की योजना लगभग एक महीने के भीतर कार्यदायी संस्था या कंपनी का चयन करने की है, ताकि इसके बाद जमीन पर काम शुरू कराया जा सके। पूरे प्रोजेक्ट को एक साल के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना की तकनीकी जांच भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान से कराने की भी तैयारी है। इससे कैमरों और पूरी निगरानी व्यवस्था की तकनीकी गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित की जा सकेगी।


20 हजार से अधिक कैमरों का बनेगा एकीकृत नेटवर्क

परियोजना के तहत लगाए जाने वाले 2,200 नए कैमरों को पहले से मौजूद 20 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों से जोड़ा जाएगा। इस नेटवर्क में शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगे कैमरे शामिल होंगे। सेक्टर-94 में एक नया नियंत्रण कक्ष बनाया जाएगा, जिसे मौजूदा यातायात प्रबंधन व्यवस्था के नियंत्रण कक्ष से जोड़ा जाएगा। प्रस्तावित व्यवस्था को ग्रेटर नोएडा और यमुना क्षेत्र की निगरानी प्रणाली से भी जोड़ने की योजना है। इससे प्रमुख सड़कों के साथ गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी को एकीकृत रूप दिया जा सकेगा।


संदिग्ध गतिविधि दिखते ही पुलिस को मिलेगी सूचना

नए नियंत्रण कक्ष को पुलिस मुख्यालय से सीधे जोड़ा जाएगा। किसी संदिग्ध गतिविधि या घटना की जानकारी सामने आने पर सूचना संबंधित थाना, पुलिस चौकी और आपातकालीन सहायता दल तक तत्काल पहुंचाने की व्यवस्था होगी। परियोजना में चेहरा पहचानने वाले कैमरे भी लगाए जाएंगे, जिनसे संदिग्ध या वांछित व्यक्तियों की पहचान में पुलिस को मदद मिल सकती है। प्रस्तावित कैमरों में अलग-अलग तकनीकी क्षमताएं होंगी। पैन-टिल्ट-जूम कैमरे करीब 1,700 मीटर तक निगरानी और रिकॉर्डिंग करने में सक्षम होंगे, जबकि बुलेट कैमरों से तेज रफ्तार वाहनों की भी स्पष्ट तस्वीर कैद की जा सकेगी। नोएडा में नंबर प्लेट पहचानने वाली व्यवस्था और सामान्य सीसीटीवी कैमरे पहले से यातायात प्रबंधन प्रणाली के तहत मौजूद हैं। नई परियोजना के जरिए इन सभी व्यवस्थाओं को एक व्यापक सुरक्षा नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। परियोजना पूरी होने के बाद संबंधित कंपनी पुलिसकर्मियों को पूरे सिस्टम के संचालन का प्रशिक्षण भी देगी। नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कृष्णा करुणेश के मुताबिक, परियोजना के लिए निविदा प्रस्ताव जारी कर दिया गया है और अगले 10 दिनों में पूर्व-निविदा बैठक होगी। करीब एक महीने में एजेंसी का चयन कर काम शुरू कराने का लक्ष्य है।

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