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नोएडा में क्लोवरलीफ इंटरचेंज से यमुना एक्सप्रेसवे की राह होगी आसान, सेक्टर-148 से 153 तक 50 हजार लोगों को फायदा

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नोएडा के सेक्टर-148 और 153 के बीच प्रस्तावित क्लोवरलीफ इंटरचेंज से सेक्टर-150 और 152 समेत आसपास के करीब 50 हजार लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है। परियोजना से एक्सप्रेसवे, स्थानीय सेक्टरों और यमुना एक्सप्रेसवे की ओर कनेक्टिविटी बेहतर होगी तथा जाम का दबाव कम हो सकता है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से विकसित हो रहे सेक्टरों में रहने वाले लोगों के लिए कनेक्टिविटी से जुड़ी बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। नोएडा प्राधिकरण सेक्टर-148 और सेक्टर-153 के बीच क्लोवरलीफ इंटरचेंज तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। इस परियोजना का सबसे बड़ा फायदा सेक्टर-150 और 152 यानी स्पोर्ट्स सिटी क्षेत्र में रहने वाले करीब 50 हजार लोगों और रोजाना यहां से गुजरने वाले वाहन चालकों को मिलने की उम्मीद है। अभी एक्सप्रेसवे के आसपास रहने वाले लोगों को एक तरफ से दूसरी तरफ जाने के लिए संकरे अंडरपास और सर्विस रोड का सहारा लेना पड़ता है। व्यस्त समय में यहां वाहनों का दबाव बढ़ने से जाम की स्थिति बन जाती है। प्रस्तावित क्लोवरलीफ से वाहनों की आवाजाही को अलग-अलग दिशाओं में व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से आगे यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाने वाले लोगों के लिए भी रास्ता आसान होने की उम्मीद है। हालांकि, अभी यह परियोजना शुरुआती चरण में है और निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।


क्या है क्लोवरलीफ इंटरचेंज प्रोजेक्ट

क्लोवरलीफ इंटरचेंज ऐसी सड़क व्यवस्था होती है, जिसमें अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को बिना बार-बार रुकने के दूसरी दिशा में जाने का रास्ता मिलता है। प्रस्तावित परियोजना में एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ की सर्विस रोड को बेहतर तरीके से जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य स्थानीय यातायात और एक्सप्रेसवे के ट्रैफिक को ज्यादा व्यवस्थित करना है। अभी सेक्टर-150 और 152 की तरफ से आने वाले वाहन चालकों को कई जगह अंडरपास और सीमित क्रॉसिंग का इस्तेमाल करना पड़ता है। क्लोवरलीफ बनने के बाद वाहनों को अपेक्षाकृत सुगम रास्ता मिल सकेगा। इससे पीक आवर में लगने वाले जाम का दबाव कम होने की उम्मीद है।


सेक्टर 148 और 153 के बीच लोकेशन

यह प्रस्तावित इंटरचेंज नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-148 और सेक्टर-153 के बीच विकसित किया जाना है। यह जगह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके आसपास सेक्टर-150, 151, 152 और 153 जैसे तेजी से विकसित हो रहे इलाके हैं। सेक्टर-148 में मेट्रो कनेक्टिविटी भी मौजूद है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में आने वाले समय में इस कॉरिडोर पर वाहनों की संख्या और बढ़ सकती है। क्लोवरलीफ का उद्देश्य स्थानीय सेक्टरों को एक्सप्रेसवे की मुख्य आवाजाही से बेहतर तरीके से जोड़ना है। इससे लोगों को छोटी दूरी के लिए भी लंबा चक्कर लगाने की जरूरत कम हो सकती है।


निर्माण कार्य कब शुरू हुआ

इस परियोजना को लेकर एक जरूरी बात यह है कि इसका निर्माण अभी शुरू नहीं हुआ है। फिलहाल नोएडा प्राधिकरण क्लोवरलीफ के डिजाइन और तकनीकी प्रक्रिया पर काम कर रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार डिजाइन तैयार होने के बाद उसे तकनीकी मंजूरी के लिए आईआईटी के सामने रखा जाएगा। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी डीपीआर तैयार होगी और फिर टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। निर्माण एजेंसी के चयन के बाद ही जमीन पर वास्तविक निर्माण शुरू हो सकेगा। इसलिए इसे फिलहाल प्रस्तावित परियोजना के तौर पर देखना सही होगा। इसके अलावा सेक्टर-148 और 150 के बीच करीब 85 करोड़ रुपये की लागत वाले एक अलग फ्लाईओवर की योजना भी सामने आई है, जिसे इस क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधारने की दिशा में अलग परियोजना माना जा रहा है।


यमुना एक्सप्रेसवे तक कनेक्टिविटी कैसे होगी बेहतर

क्लोवरलीफ बनने के बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से जुड़े वाहनों की आवाजाही ज्यादा सुगम होने की उम्मीद है। खासकर सेक्टर-150 और 152 की तरफ से आने-जाने वाले लोगों को एक्सप्रेसवे पार करने और आगे की दिशा पकड़ने में सुविधा मिल सकती है। इसका अप्रत्यक्ष लाभ यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ जाने वाले यात्रियों को भी मिलेगा, क्योंकि स्थानीय सड़कों और अंडरपास पर दबाव कम होने से मुख्य मार्ग तक पहुंच आसान होगी। यमुना एक्सप्रेसवे आगे जेवर एयरपोर्ट और यमुना क्षेत्र की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में नोएडा के दक्षिणी सेक्टरों से इसकी कनेक्टिविटी बेहतर होना आने वाले समय में काफी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि क्लोवरलीफ सीधे यमुना एक्सप्रेसवे का नया लिंक बनेगा।


किन इलाकों के 50,000 निवासियों को मिलेगा फायदा

इस परियोजना का सीधा फायदा मुख्य रूप से सेक्टर-150 और सेक्टर-152 में रहने वाले करीब 50 हजार लोगों को मिलने की उम्मीद है। इन इलाकों में बड़ी संख्या में आवासीय परियोजनाएं और स्पोर्ट्स सिटी से जुड़ी गतिविधियां हैं। इसके अलावा सेक्टर-148, 151 और 153 के लोगों तथा रोजाना यहां से गुजरने वाले कर्मचारियों और अन्य यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिल सकता है। जैसे-जैसे इन सेक्टरों में आबादी बढ़ रही है, वैसे-वैसे सड़क पर वाहनों का दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में सिर्फ मौजूदा आबादी ही नहीं, बल्कि भविष्य में यहां बसने वाले परिवारों के लिए भी यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है। बेहतर सड़क संपर्क से रोजाना आने-जाने में लगने वाला समय और ईंधन दोनों बचने की उम्मीद है।


ट्रैफिक जाम की मौजूदा समस्या और समाधान

फिलहाल इस क्षेत्र में सबसे बड़ी परेशानी एक्सप्रेसवे के आसपास बने सीमित क्रॉसिंग पॉइंट और संकरे अंडरपास हैं। पीक आवर में जब बड़ी संख्या में लोग ऑफिस, स्कूल और दूसरे कामों के लिए निकलते हैं, तो इन रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ जाता है। इससे जाम के साथ-साथ लोगों को अतिरिक्त दूरी भी तय करनी पड़ती है। प्रस्तावित क्लोवरलीफ का मकसद इसी दबाव को अलग-अलग दिशाओं में बांटना है। अगर परियोजना तय डिजाइन के अनुसार तैयार होती है तो स्थानीय वाहनों को ज्यादा व्यवस्थित क्रॉसिंग मिलेगी और अंडरपास पर निर्भरता कम हो सकती है। इसके साथ ही अलग प्रस्तावित फ्लाईओवर भी सेक्टर-148 से 153 के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करने में मदद कर सकता है। दोनों परियोजनाओं के पूरा होने पर इस इलाके के ट्रैफिक नेटवर्क में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

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