नोएडा में पर्सनल लोन के नाम पर साइबर ठगी का खुलासा, फर्जी लोन पत्र भेजकर रकम ऐंठने वाले दो आरोपी गिरफ्तार
- Shiv Kumar
- 03 Sep, 2026
नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने पर्सनल लोन दिलाने के नाम पर लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के दो वांछित साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। दोनों आरोपियों को तकनीकी साक्ष्यों, डिजिटल विश्लेषण, निगरानी और गोपनीय सूचना के आधार पर 2 सितंबर 2026 को गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी से पकड़ा गया। पुलिस के मुताबिक, यह गिरोह लोन की जरूरत वाले लोगों को फोन कर उन्हें पर्सनल लोन दिलाने का झांसा देता था। इसके बाद फर्जी लोन स्वीकृति पत्र भेजकर उनसे प्रक्रिया शुल्क के नाम पर पैसे लिए जाते थे। जांच में सामने आया कि गिरोह ने RuLoans कंपनी से मिले डाटा का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया। मामले में पहले भी दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 15 दिसंबर 2025 को जेल भेजा जा चुका है।
लोन दिलाने के नाम पर भेजते थे फर्जी स्वीकृति पत्र
पुलिस के अनुसार, गिरोह लोन लेने के इच्छुक लोगों की जानकारी का इस्तेमाल कर उनसे संपर्क करता था। लोगों को बताया जाता था कि उनका पर्सनल लोन स्वीकृत हो गया है। इसके बाद उन्हें फर्जी लोन स्वीकृति पत्र भेजा जाता था और प्रक्रिया शुल्क सहित अलग-अलग नाम पर रकम मांगी जाती थी। ठगी की रकम हासिल करने के लिए आरोपी अपने बैंक खाते और दूसरे लोगों के बैंक खातों का भी इस्तेमाल करते थे। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे अपने बैंक खाते साइबर अपराधियों को 10 प्रतिशत कमीशन पर उपलब्ध कराते थे। इन खातों में ठगी से हासिल रकम जमा होने के बाद आरोपी अपना कमीशन काटकर बाकी रकम संबंधित साइबर अपराधियों को दे देते थे।
दोनों खातों में पहुंचे 3.40 लाख रुपये
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान 21 वर्षीय तुषार पुत्र कपिल देव और 21 वर्षीय सुमित कुमार पुत्र रामेश्वर प्रसाद के रूप में हुई है। दोनों गाजियाबाद की खोड़ा कॉलोनी के रहने वाले हैं। पुलिस के मुताबिक, तुषार के बैंक खाते में 1.20 लाख रुपये और सुमित के खाते में 2.20 लाख रुपये प्राप्त हुए। यानी दोनों खातों में कुल 3.40 लाख रुपये पहुंचे थे। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि इन बैंक खातों के खिलाफ अलग-अलग राज्यों में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर दो शिकायतें दर्ज हैं। इनमें महाराष्ट्र और तमिलनाडु की शिकायतें शामिल हैं। पुलिस अब इन लेनदेन से जुड़े दूसरे खातों और लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
बैंक खातों और डिजिटल नेटवर्क की जांच जारी
साइबर क्राइम पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अन्य सहयोगियों, बैंक खातों, वेबसाइटों और डिजिटल नेटवर्क की जांच जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ठगी का पूरा नेटवर्क किस तरह संचालित किया जा रहा था और इसमें कितने लोग जुड़े हैं। इस संबंध में साइबर क्राइम थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत मुकदमा दर्ज है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें। किसी अनजान व्यक्ति को आधार कार्ड, पैन कार्ड या बैंक खाते की जानकारी न दें और अनजान लिंक पर क्लिक न करें। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं है। कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी दूसरे विभाग का अधिकारी बनकर फोन पर गिरफ्तारी का डर दिखाए तो घबराने के बजाय तुरंत पुलिस या साइबर पुलिस से संपर्क करें। फर्जी निवेश प्रस्तावों पर भी भरोसा न करने की सलाह दी गई है।
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