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नोएडा जिला अस्पताल के 2 डॉक्टरों पर विभागीय जांच के आदेश, मरीज के इलाज में लापरवाही के आरोप, डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने लिया संज्ञान

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नोएडा सेक्टर-39 जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों पर मरीज के इलाज में कथित लापरवाही के मामले में विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर डॉ. असद महमूद और डॉ. अरविंद मलिक की भूमिका की जांच होगी। मामला अगस्त 2024 का है।

नोएडा सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। मरीज के इलाज में कथित लापरवाही के मामले में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दोनों डॉक्टरों के खिलाफ जांच के निर्देश दिए हैं। जांच के घेरे में जिला अस्पताल के डॉ. असद महमूद और डॉ. अरविंद मलिक हैं। मामला अगस्त 2024 का बताया जा रहा है, जब एक मरीज के इलाज में समय पर उपचार नहीं मिलने और लापरवाही के आरोप लगाए गए थे। मरीज की शिकायत बाद में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंची थी। परिजनों ने भी अस्पताल में हंगामा कर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया था। स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई थी। अब शासन के स्तर से विभागीय जांच के आदेश के बाद अस्पताल प्रशासन में हलचल बढ़ गई है।


अगस्त 2024 में इलाज को लेकर उठे थे सवाल

जानकारी के मुताबिक, अगस्त 2024 में जिला अस्पताल में एक मरीज के इलाज को लेकर गंभीर शिकायत सामने आई थी। आरोप था कि मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल पाया, जिससे उसकी हालत गंभीर हो गई। मरीज के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया था। मामला बढ़ने के बाद इसकी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंची। इसके साथ ही स्थानीय पुलिस की ओर से तैयार रिपोर्ट भी शासन को भेजी गई थी। शिकायत में इलाज के दौरान बरती गई कथित लापरवाही और मरीज को समय पर उपचार नहीं मिलने से जुड़े बिंदुओं को उठाया गया था। लंबे समय बाद अब शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों डॉक्टरों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।


डॉ. असद महमूद और डॉ. अरविंद मलिक जांच के घेरे में

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश के बाद जिला अस्पताल के डॉ. असद महमूद और डॉ. अरविंद मलिक के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी। जांच में मरीज के इलाज के दौरान अपनाई गई प्रक्रिया, उपचार में लगे समय और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पड़ताल की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि उस समय अस्पताल में मरीज के उपचार को लेकर क्या स्थिति थी और संबंधित डॉक्टरों की भूमिका क्या रही। जांच के दौरान उपलब्ध चिकित्सकीय रिकॉर्ड, शिकायत और स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों को भी देखा जा सकता है। विभागीय जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों डॉक्टरों की ओर से इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।


शिकायत से लेकर शासन तक पहुंचा था मामला

मरीज के परिजनों की शिकायत के बाद मामला स्थानीय स्तर से आगे बढ़कर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा था। परिजनों ने अस्पताल में इलाज में देरी और कथित लापरवाही को लेकर सवाल उठाए थे। स्थानीय पुलिस की रिपोर्ट भी शासन को भेजे जाने की बात सामने आई है। अब विभागीय जांच के आदेश के बाद इस पूरे मामले की दोबारा पड़ताल होगी। जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल दोनों डॉक्टर जांच के घेरे में हैं और अस्पताल प्रशासन भी मामले को लेकर संबंधित प्रक्रिया पूरी करने में जुटा है।

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