किसानों के आंदोलन को फिलहाल एक महीने का विराम, 14 सितंबर से तीनों प्राधिकरणों पर चल रहा था भारतीय किसान यूनियन का धरना

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भारतीय किसान यूनियन ने नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण पर 14 सितंबर से चल रहा धरना एक महीने के लिए स्थगित कर दिया। राकेश टिकैत ने अधिकारियों को किसानों की मांगों के समाधान के लिए समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण पर किसानों का 14 सितंबर से चल रहा धरना फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। भारतीय किसान यूनियन ने बुधवार देर शाम तीनों प्राधिकरणों पर चल रहे प्रदर्शन को एक महीने के लिए रोकने का फैसला लिया। भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधिमंडल के साथ राकेश टिकैत ने बुधवार को अलग-अलग प्राधिकरणों के अधिकारियों के साथ बैठक की। देर शाम यमुना प्राधिकरण में भी अधिकारियों के साथ बातचीत हुई। इसके बाद टिकैत ने कहा कि किसानों की मांगों पर अधिकारियों को एक महीने का समय दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस अवधि में किसानों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो एक महीने बाद तीनों प्राधिकरणों पर दोबारा आंदोलन शुरू किया जाएगा।


अधिकारियों के साथ बैठक के बाद लिया फैसला

बुधवार को राकेश टिकैत के नेतृत्व में भारतीय किसान यूनियन के प्रतिनिधिमंडल ने अलग-अलग प्राधिकरणों के अधिकारियों से मुलाकात की। बैठकों में किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांगों और उनसे जुड़े मामलों पर चर्चा हुई। इसके बाद देर शाम यमुना प्राधिकरण में भी अधिकारियों के साथ बैठक हुई। बैठक के बाद टिकैत ने कहा कि किसान लंबे समय से अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं और प्राधिकरणों को उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए। अधिकारियों की ओर से मिले आश्वासन के बाद संगठन ने धरना फिलहाल एक महीने के लिए स्थगित करने का फैसला किया। इसके साथ ही प्राधिकरणों को मांगों पर कार्रवाई के लिए समय दिया गया है।


10 प्रतिशत प्लॉट और 64.7 प्रतिशत मुआवजे की मांग

राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को 10 प्रतिशत आवासीय प्लॉट और 64.7 प्रतिशत मुआवजा मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के विकास की जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों की है। वहीं भारतीय किसान यूनियन के नेता पवन खटाना के मुताबिक, किसान लंबे समय से 64.7 प्रतिशत अतिरिक्त मुआवजे, आबादी के मामलों के निस्तारण, 10 प्रतिशत आवासीय प्लॉट और 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून को लागू करने की मांग कर रहे हैं। इन्हीं मांगों को लेकर 14 सितंबर से तीनों प्राधिकरणों पर धरना शुरू किया गया था। संगठन का कहना है कि किसानों के इन मुद्दों का समाधान अभी तक नहीं हो पाया है।


एक महीने बाद फिर शुरू हो सकता है आंदोलन

राकेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि धरना स्थायी रूप से खत्म नहीं किया गया है, बल्कि अधिकारियों को एक महीने का समय देते हुए इसे स्थगित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस अवधि में अगर किसानों की मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई होती है तो स्थिति अलग होगी, लेकिन प्राधिकरणों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई तो भारतीय किसान यूनियन दोबारा तीनों प्राधिकरणों पर धरना शुरू करेगी। इस चेतावनी के बाद अब प्राधिकरणों के सामने किसानों की मांगों पर कार्रवाई करने की समयसीमा भी तय हो गई है। संगठन की नजर अगले एक महीने में होने वाली कार्रवाई पर रहेगी।


धरना खत्म होते ही घर लौटे किसान

तीनों प्राधिकरणों पर धरना स्थगित किए जाने की घोषणा के बाद वहां मौजूद सैकड़ों किसान अपने घरों की ओर लौट गए। कई दिनों से प्राधिकरण कार्यालयों के बाहर चल रहे प्रदर्शन के कारण अधिकारियों और किसानों के बीच लगातार बातचीत का दौर चल रहा था। बुधवार की बैठकों के बाद फिलहाल आंदोलन रुकने से प्राधिकरणों को भी राहत मिली है। अब किसानों की मांगों पर आगे क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजर रहेगी। एक महीने की अवधि पूरी होने के बाद भारतीय किसान यूनियन अगला फैसला लेगी।

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