नोएडा में स्नेचिंग गैंग पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, 22 बाइक और 31 फोन बरामद, दो नाबालिग भी पकड़े गए

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नोएडा सेक्टर-24 पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में दोपहिया वाहन चोरी और मोबाइल स्नैचिंग करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। चार आरोपी गिरफ्तार और दो बाल अपचारी संरक्षण में लिए गए हैं। पुलिस ने 22 दोपहिया वाहन, 31 मोबाइल फोन, 2500 रुपये और तीन चाकू बरामद किए हैं।

नोएडा के सेक्टर-24 थाना पुलिस ने दिल्ली-एनसीआर में दोपहिया वाहन चोरी और मोबाइल स्नैचिंग करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि गिरोह से जुड़े दो बाल अपचारियों को भी संरक्षण में लिया गया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से 22 चोरी के दोपहिया वाहन, 31 स्नैच किए गए मोबाइल फोन, 2,500 रुपये नकद और तीन अवैध चाकू बरामद किए गए हैं। एडीसीपी मनीषा सिंह के अनुसार, गिरोह के सदस्य पहले मोटरसाइकिल और स्कूटी चोरी करते थे और फिर उन्हीं वाहनों से मोबाइल स्नैचिंग की वारदातों को अंजाम देते थे। पहचान से बचने के लिए चोरी के वाहनों को लगातार बदलते रहते थे।


चोरी की बाइक से करते थे मोबाइल स्नैचिंग

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य दिल्ली-एनसीआर के अलग-अलग इलाकों में पहले रेकी करते थे। सुनसान जगहों पर खड़ी मोटरसाइकिल और स्कूटी को निशाना बनाकर चोरी करने के बाद इन्हीं वाहनों का इस्तेमाल मोबाइल छीनने में किया जाता था। आरोपी सड़क किनारे पैदल चल रहे लोगों को निशाना बनाते और वारदात के बाद तेजी से निकल जाते थे। पुलिस का कहना है कि एक ही वाहन का लगातार इस्तेमाल नहीं किया जाता था। चोरी की बाइक या स्कूटी को जंगल, झाड़ियों और दूसरी सुनसान जगहों पर छिपा दिया जाता था। इसके बाद किसी दूसरे चोरी के वाहन से अगली वारदात की जाती थी, जिससे पुलिस के लिए वाहनों की पहचान और आरोपियों तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता था।


बिहार तक पहुंचता था चोरी के मोबाइल का नेटवर्क

जांच में पुलिस के सामने मोबाइल फोन बेचने का नेटवर्क भी सामने आया है। एडीसीपी के मुताबिक, विश्वा महतो उर्फ राजा गिरोह में चोरी के मोबाइल खपाने वाले व्यक्ति की भूमिका में था। कुछ छीने गए मोबाइल फोन स्थानीय स्तर पर राहगीरों को कम कीमत में बेच दिए जाते थे, जबकि कुछ मोबाइल बिहार ले जाकर वहां बेचने की बात सामने आई है। पुलिस के अनुसार, बिहार में इन मोबाइल को अपेक्षाकृत अच्छे दाम पर बेचा जाता था। मोबाइल की बिक्री से मिलने वाली रकम आरोपियों के बीच बांटी जाती थी और उसे अपने खर्च और शौक में इस्तेमाल किया जाता था। पुलिस अब बरामद मोबाइल फोन के असली मालिकों की पहचान करने के

साथ उनसे जुड़े मामलों का भी मिलान कर रही है।


मैनुअल जांच और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी से पकड़े गए आरोपी

एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि पुलिस ने गिरोह तक पहुंचने के लिए मैनुअल सूचना तंत्र और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का सहारा लिया। इसके बाद सेक्टर-24 और खोड़ा इलाके से आरोपियों को पकड़ा गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विक्की यादव उर्फ मोटा, करण नागर, रविन्द्र और विश्वा महतो उर्फ राजा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार विक्की और करण की उम्र 19 वर्ष, रविन्द्र की 21 वर्ष और विश्वा महतो की 26 वर्ष है। विश्वा मूल रूप से समस्तीपुर, बिहार का रहने वाला है और वर्तमान में खोड़ा कॉलोनी में रह रहा था। तीनों अन्य आरोपी दिल्ली के रहने वाले बताए गए हैं। पुलिस बरामद वाहनों और मोबाइल फोन से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।


कई थानों में दर्ज हैं मामले

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ नोएडा और दिल्ली के अलग-अलग थानों में चोरी और स्नैचिंग से जुड़े मामले दर्ज हैं। जांच में सेक्टर-24, बिसरख और सेक्टर-39 थाने के मामलों के साथ दिल्ली के सरिता विहार और न्यू अशोक नगर थाने के मुकदमों का भी उल्लेख सामने आया है। पुलिस अब 22 बरामद दोपहिया वाहनों और 31 मोबाइल फोन का अलग-अलग मामलों से मिलान कर रही है। इसके जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि गिरोह ने अब तक कितनी वारदातों को अंजाम दिया और इसमें अन्य लोग भी शामिल हैं या नहीं। आगे की जांच के आधार पर पुलिस कार्रवाई जारी है।

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