श्रमिक हिंसा मामले में तीन आरोपियों की जमानत याचिका खारिज, आंदोलन से जुड़े लोगों के संपर्क में रहने का आरोप

top-news
नोएडा सेक्टर-84 मदरसन श्रमिक हिंसा मामले में सत्र अदालत ने प्रियंवदा शर्मा, प्रेरित लोधा और शिवानी कौल की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। अभियोजन ने व्हाट्सऐप चैट, ऑडियो-वीडियो और टेलीग्राम ग्रुप से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का हवाला दिया।

नोएडा। सेक्टर-84 स्थित मदरसन कंपनी के पास 13 अप्रैल को हुई श्रमिक हिंसा के मामले में सत्र अदालत ने प्रियंवदा शर्मा, प्रेरित लोधा और शिवानी कौल की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। अभियोजन ने तीनों की भूमिका से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का हवाला दिया, जबकि बचाव पक्ष ने दावा किया कि घटना के समय तीनों मौके पर मौजूद नहीं थे। अदालत ने केस डायरी और अभियोजन की ओर से पेश सामग्री का अवलोकन करने के बाद अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया।


वेतन और अन्य मांगों को लेकर जुटे थे श्रमिक
अभियोजन के मुताबिक, श्रमिक वेतन बढ़ोतरी, ओवरटाइम और बोनस समेत अन्य मांगों को लेकर मदरसन कंपनी के पास एकत्र हुए थे। प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम होने के बाद पुलिस ने स्थिति संभालने का प्रयास किया। अभियोजन का आरोप है कि इसके बाद भीड़ हिंसक हो गई और पुलिस पर लाठी-डंडों व ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। पुलिस के अनुसार घटना में कई पुलिसकर्मी घायल हुए और सरकारी व निजी वाहनों को भी नुकसान पहुंचाया गया। मामले में बड़ी संख्या में अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं।


डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर भूमिका का दावा
अभियोजन ने अदालत में केस डायरी में शामिल व्हाट्सऐप चैट और ऑडियो-वीडियो के विश्लेषण का हवाला दिया। अभियोजन का दावा है कि इन डिजिटल साक्ष्यों से प्रियंवदा शर्मा, प्रेरित लोधा और शिवानी कौल की आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में भूमिका सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों पर आंदोलन से संबंधित फोटो-वीडियो हासिल करने और श्रमिकों को भड़काने में शामिल होने का आरोप लगाया गया है। शिवानी कौल के संबंध में अभियोजन ने टेलीग्राम पर बने बिगुल मीडिया ग्रुप की सक्रिय सदस्य होने की बात भी अदालत के सामने रखी।


बचाव पक्ष ने कहा- घटना के समय मौके पर नहीं थे
तीनों आरोपितों की ओर से अदालत में कहा गया कि वे घटना के समय घटनास्थल पर मौजूद नहीं थे। बचाव पक्ष ने दावा किया कि पुलिस के रवैये से संबंधित जानकारी सोशल मीडिया पर साझा करने के कारण उन्हें मामले में आरोपी बनाया गया है। दूसरी ओर अभियोजन ने डिजिटल सामग्री और केस डायरी में दर्ज तथ्यों को उनके खिलाफ आधार बताया। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद सत्र अदालत ने तीनों की अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *