नोएडा बस अग्निकांड की जांच के लिए विशेष टीम गठित, 7 दिन में रिपोर्ट देने के निर्देश, ट्रैवल एजेंसी मैनेजर गिरफ्तार

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यमुना एक्सप्रेसवे बस अग्निकांड में नौ लोगों की मौत के बाद अब तकनीकी जांच होगी। सेव लाइफ फाउंडेशन बस की जांच कर सात दिन में रिपोर्ट देगा। पुलिस ने ट्रैवल एजेंसी के मैनेजर विकास को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य आरोपियों से भी पूछताछ जारी है।

यमुना एक्सप्रेसवे पर एसी स्लीपर बस में आग लगने से नौ लोगों की मौत के बाद अब हादसे के तकनीकी कारणों की जांच कराई जाएगी। उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने बस में आग लगने की वजह पता लगाने की जिम्मेदारी सेव लाइफ फाउंडेशन को दी है। परिवहन मुख्यालय स्तर पर गठित विशेष टीम बस की तकनीकी स्थिति की जांच करेगी और सात दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि आग की शुरुआत कहां से हुई और इसके पीछे कौन-सी तकनीकी खराबी जिम्मेदार थी। टीम बस के इंजन से लेकर विद्युत व्यवस्था, ईंधन लाइन और एसी प्रणाली तक की जांच करेगी। हादसे के बाद बस की हालत और पहले सामने आई संभावित तकनीकी खामियों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। इसी बीच पुलिस ने ट्रैवल एजेंसी के मैनेजर विकास को भी गिरफ्तार किया है।


इंजन से एसी सिस्टम तक होगी जांच

तकनीकी जांच में बस के इंजन कंपार्टमेंट, विद्युत प्रणाली, ईंधन लाइन और एसी सिस्टम की बारीकी से पड़ताल की जाएगी। इसके साथ यह भी देखा जाएगा कि बस की तकनीकी स्थिति कैसी थी और हादसे से पहले उसमें किसी तरह की खराबी सामने आई थी या नहीं। जांच टीम आग लगने के घटनाक्रम से जुड़े तकनीकी पहलुओं को जोड़कर इसकी वजह का पता लगाने का प्रयास करेगी। परिवहन विभाग की ओर से कराई जा रही यह जांच हादसे के कारणों को स्पष्ट करने के साथ बस के रखरखाव और संचालन से जुड़े पहलुओं की भी जानकारी दे सकती है। स्वतंत्र जांच की जिम्मेदारी सेव लाइफ फाउंडेशन को दी गई है और संस्था तकनीकी निरीक्षण के बाद सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।


बस की हालत को लेकर मैनेजर गिरफ्तार

पुलिस ने ट्रैवल एजेंसी के मैनेजर विकास को कथित लापरवाही के मामले में गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, बस की हालत से जुड़ी कुछ खामियों की जानकारी होने के बावजूद उसे चलवाया जा रहा था। जांच में बस के इंजन में खराबी आने और क्षमता से ज्यादा सामान लादे जाने की बात भी सामने आई है। पुलिस ने इससे पहले बस के दोनों चालकों पवन कुमार और योगेश दीक्षित तथा कंडक्टर रोहित कुमार को गिरफ्तार किया था। मैनेजर समेत चारों आरोपियों को जिला अदालत में पेश किया गया, जहां से सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस अब बस की पिछली सर्विस और उससे जुड़े दूसरे रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।


रिपोर्ट से सामने आएगा आग लगने का तकनीकी कारण

हादसे के बाद अब जांच का सबसे अहम पहलू यह पता लगाना है कि बस में आग आखिर किस वजह से लगी। इंजन, वायरिंग, ईंधन लाइन और एसी सिस्टम की जांच से आग के संभावित स्रोत की जानकारी मिलने की उम्मीद है। पुलिस और परिवहन विभाग बस के रखरखाव और संचालन से जुड़े पहलुओं को भी जांच में शामिल कर रहे हैं। हादसे के समय बस में 35 यात्री सवार थे, जिनमें 26 लोग सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि नौ यात्रियों की मौत हो गई। पुलिस ने हादसे से जुड़े अन्य संभावित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच जारी रखी है। तकनीकी रिपोर्ट सामने आने के बाद आग लगने की वजह और बस की स्थिति को लेकर तस्वीर और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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