ग्रेटर नोएडा में मौसम की मार से धान की खड़ी फसल गिरी, किसान परेशान, प्रशासन से मुआवजे की मांग

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ग्रेटर नोएडा के ग्रामीण क्षेत्रों में तेज हवा और बारिश से पकी धान की फसल खेतों में गिर गई। सदर, दादरी और जेवर तहसील के किसानों ने फसल नुकसान का सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग प्रशासन से की है।

ग्रेटर नोएडा: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में बारिश और तेज हवाओं के बीच ग्रेटर नोएडा के ग्रामीण इलाकों में पकी धान की फसल को नुकसान पहुंचने की खबर है। कई खेतों में कटाई के लिए तैयार धान की फसल तेज हवा और बारिश के कारण जमीन पर गिर गई। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि फसल पकने के बाद मौसम खराब होने से उनकी मेहनत पर असर पड़ा है और अब नुकसान की भरपाई की चिंता सता रही है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने भी 26 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अत्यधिक बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की थी।


सदर, दादरी और जेवर क्षेत्र में फसल प्रभावित

गौतम बुद्ध नगर जिले में सदर, दादरी और जेवर तीन तहसीलें हैं। जिले की प्रमुख फसलों में धान भी शामिल है। किसानों के मुताबिक, इन तहसील क्षेत्रों के अलग-अलग गांवों में तेज हवा और बारिश के कारण खेतों में खड़ी धान की फसल गिर गई। कई जगह पकी फसल खेत में बिछी दिखाई दे रही है। किसानों का कहना है कि इस समय धान की फसल कटाई के लिए तैयार थी। ऐसे में मौसम बिगड़ने से फसल के गिरने के कारण उन्हें नुकसान की आशंका है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्र और वास्तविक नुकसान का अंतिम आंकड़ा प्रशासनिक सर्वे के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।


तेज हवा और बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता

पिछले दिनों पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मौसम को लेकर IMD की ओर से लगातार चेतावनी जारी की गई थी। 26 सितंबर के पूर्वानुमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए अत्यधिक बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की स्थिति बताई गई थी। 27 सितंबर के लिए भी बहुत भारी बारिश और गरज-चमक के साथ तेज हवाओं की चेतावनी दी गई थी। ऐसे मौसम में पककर तैयार धान की फसल के गिरने से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। किसानों के अनुसार, खेत में गिरी फसल की कटाई और उसे सुरक्षित निकालना भी चुनौती बन सकता है।


किसानों ने सर्वे कराकर मुआवजा देने की मांग की

फसल को हुए नुकसान के बाद किसानों ने प्रशासन से प्रभावित खेतों का सर्वे कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नुकसान का सही आकलन कराकर पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा दिलाया जाए। उनका कहना है कि फसल तैयार होने के समय मौसम की मार से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर नुकसान का अंतिम सरकारी आंकड़ा सामने नहीं आया है। प्रशासनिक स्तर पर सर्वे होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सदर, दादरी और जेवर तहसील में कितने क्षेत्र में धान की फसल प्रभावित हुई है और नुकसान की वास्तविक स्थिति क्या है।

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