न्यू नोएडा को बसाने की तैयारी तेज, 80 गांवों की जमीन का होगा अधिग्रहण, शहर के लिए बने तीन सर्किल

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न्यू नोएडा में जमीन अधिग्रहण और अवैध निर्माण रोकने के लिए प्राधिकरण ने तीन नए सर्किल बनाए हैं। 80 गांवों की जमीन पर प्रस्तावित शहर को चार चरणों में विकसित किया जाएगा। किसानों से सहमति के आधार पर जमीन लेकर मुआवजा और आबादी भूखंड का लाभ देने की योजना है।

नोएडा। न्यू नोएडा यानी दादरी-नोएडा-गाजियाबाद निवेश क्षेत्र (DNGIR) में जमीन अधिग्रहण और अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए प्राधिकरण ने तीन नए सर्किल बनाए हैं। न्यू नोएडा को 80 गांवों की जमीन पर विकसित करने की योजना है, जहां करीब 6 लाख लोगों के रहने का अनुमान है। पहले चरण में सर्किल-11, 12 और 14 बनाए गए हैं। इनकी जिम्मेदारी प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपी गई है। सर्किल-11 का जिम्मा जीएम एसपी सिंह को दिया गया है, जबकि सर्किल-12 और 14 की जिम्मेदारी जीएम एके अरोड़ा संभालेंगे। इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी कर दिया गया है। अब इन सर्किलों में सीनियर मैनेजर और मैनेजर की नियुक्ति की जाएगी, जो अवैध निर्माण रोकने और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभालेंगे।


80 गांवों की जमीन पर बसेगा न्यू नोएडा

न्यू नोएडा को योजनाबद्ध तरीके से विकसित करने के लिए प्राधिकरण ने बड़े स्तर पर तैयारी शुरू की है। प्रस्तावित शहर का मास्टर प्लान 209.11 वर्ग किलोमीटर यानी 20,911.29 हेक्टेयर क्षेत्र में तैयार किया गया है। योजना के तहत करीब 80 गांवों की जमीन अधिग्रहित कर शहर विकसित किया जाना है। यहां लगभग 6 लाख की आबादी को ध्यान में रखकर विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। जमीन अधिग्रहण के साथ-साथ अतिक्रमण रोकना भी प्राधिकरण के लिए अहम होगा। इसी उद्देश्य से तीन नए सर्किल बनाए गए हैं। अधिकारियों की नियुक्ति के बाद इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण पर निगरानी और विकास से जुड़े कामों को गति देने की तैयारी है।


चार चरणों में पूरा होगा विकास कार्य

न्यू नोएडा के विकास की योजना को चार चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में वर्ष 2023 से 2027 तक 3,165 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार, इस चरण की समयसीमा नजदीक आने के कारण काम शुरू करने की तैयारी की जा रही है। दूसरे चरण में 2027 से 2032 के बीच 3,798 हेक्टेयर भूमि पर विकास कार्य प्रस्तावित हैं। तीसरे चरण में 2032 से 2037 तक 5,908 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जाएगा। वहीं, चौथे चरण के लिए 2037 से 2041 तक का समय निर्धारित किया गया है, जिसमें 8,230 हेक्टेयर क्षेत्र को विकसित करने की योजना है। इस तरह पूरे क्षेत्र का विकास चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।


किसानों की सहमति से जमीन लेने की तैयारी

न्यू नोएडा के लिए जमीन लेने के संबंध में प्राधिकरण ने मुआवजा नीति तय की है। इसके तहत किसानों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदी जाएगी। पहले और दूसरे चरण में जमीन खरीद की मुआवजा दर और 6 प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के अनुरूप दिया जाएगा। वहीं, तीसरे और चौथे चरण में मुआवजे के साथ 7 प्रतिशत आबादी भूखंड का लाभ यमुना प्राधिकरण की नीति के अनुसार मिलेगा। इस व्यवस्था के जरिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की योजना है। किसानों को मिलने वाले मुआवजे और आबादी भूखंड का लाभ चरण के अनुसार तय किया जाएगा।


GIS मैप से तय होगा आवासीय और औद्योगिक क्षेत्रों का स्वरूप

प्राधिकरण अधिकारियों के मुताबिक, न्यू नोएडा के नियोजित विकास में भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) मैप की अहम भूमिका होगी। भू-स्थानिक डेटा के विश्लेषण के बाद तैयार होने वाले इस मैप से यह तय करने में मदद मिलेगी कि आवासीय, औद्योगिक और संस्थागत क्षेत्र कहां विकसित किए जाएं। इसके जरिए जल निकायों के संरक्षण और सड़क नेटवर्क की योजना बनाने में भी सहायता मिलेगी। प्राधिकरण का उद्देश्य क्षेत्र को आधुनिक और व्यवस्थित शहर के रूप में विकसित करना है। नए सर्किलों के गठन से जमीन अधिग्रहण, अवैध निर्माण पर निगरानी और विकास कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी तय करने में मदद मिलेगी।

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