नोएडा में NCR का पहला डबल डेकर ब्रिज बनाने की तैयारी, जानें रूट, लागत और जाम से राहत की पूरी डिटेल

top-news
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में NCR के पहले डबल डेकर रोड प्रोजेक्ट को मंजूरी मिली है। पहले चरण में NH-9 से तीन मूर्ति चौक तक 3.28 किलोमीटर कॉरिडोर प्रस्तावित है। दूसरे चरण में इसे पर्थला सिग्नेचर ब्रिज से जोड़ने की योजना है। निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है।

ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लोगों को ट्रैफिक जाम से राहत दिलाने के लिए NCR के पहले डबल डेकर रोड प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल गई है। हालांकि, अभी इसका निर्माण पूरा नहीं हुआ है। इस परियोजना का पहला चरण दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे यानी NH-9 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के तीन मूर्ति चौक तक बनाया जाना है। इसके बाद दूसरे चरण में इसे आगे बढ़ाकर पर्थला सिग्नेचर ब्रिज से जोड़ने की योजना है। परियोजना का उद्देश्य ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गाजियाबाद और दिल्ली के बीच आने-जाने वाले वाहनों को बेहतर रास्ता देना है। खासकर शाहबेरी, गौर सिटी, एक मूर्ति और तीन मूर्ति चौक के आसपास लगने वाले जाम को कम करने पर ध्यान दिया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, पहले चरण में करीब 3.28 किलोमीटर लंबा चार-चार लेन वाला कॉरिडोर प्रस्तावित है। परियोजना को मंजूरी मिलने के बाद अब डिजाइन, टेंडर और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़नी है।


क्या है डबल डेकर ब्रिज प्रोजेक्ट

डबल डेकर ब्रिज ऐसी सड़क व्यवस्था है, जिसमें एक ही कॉरिडोर पर दो अलग-अलग स्तरों पर यातायात चल सकता है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की इस परियोजना में ऊपर की सड़क से लंबी दूरी के वाहन दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और आसपास के प्रमुख मार्गों की ओर जा सकेंगे, जबकि नीचे की सड़क का इस्तेमाल स्थानीय यातायात के लिए किया जा सकेगा। इससे आसपास की सोसायटियों से निकलने वाले वाहनों और एक्सप्रेसवे की ओर जाने वाले ट्रैफिक को अलग-अलग रास्ते मिलने की उम्मीद है। परियोजना के पहले चरण में NH-9 से तीन मूर्ति चौक तक कनेक्टिविटी विकसित की जाएगी। आगे के चरण में इसे पर्थला सिग्नेचर ब्रिज से जोड़ने की योजना है। इस तरह ग्रेटर नोएडा वेस्ट से दिल्ली और गाजियाबाद की ओर जाने वाले लोगों को वैकल्पिक और अधिक सुगम मार्ग मिल सकता है।


ब्रिज की लंबाई और डिजाइन

पहले चरण में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से तीन मूर्ति चौक तक करीब 3.28 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर प्रस्तावित है। इसमें चार-चार लेन की व्यवस्था होगी। रिपोर्टों के मुताबिक, पूरे प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाते हुए पर्थला सिग्नेचर ब्रिज तक जोड़ने की योजना भी बनाई गई है। अलग-अलग रिपोर्टों में पूरे मार्ग की लंबाई को लेकर अलग आंकड़े सामने आए हैं, इसलिए अंतिम लंबाई विस्तृत डिजाइन और परियोजना के अंतिम स्वरूप के बाद ही स्पष्ट होगी। निर्माण के लिए पिलर और प्रीकास्ट यू-गर्डर जैसी तकनीक इस्तेमाल किए जाने की जानकारी दी गई है। इससे निर्माण स्थल पर काम का समय कम करने और लंबे समय तक ट्रैफिक डायवर्जन की जरूरत घटाने में मदद मिल सकती है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 760 करोड़ रुपये बताई गई है।


पहला चरण कब पूरा होगा

सितंबर 2026 में सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, परियोजना को प्राधिकरणों से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है। रिपोर्ट में दिए गए प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार, 10 अक्टूबर तक फाइनल डिजाइन तैयार करने और 31 अक्टूबर तक टेंडर जारी करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके बाद जनवरी 2027 में निर्माण शुरू करने और 31 जुलाई 2027 तक परियोजना को ट्रायल के लिए तैयार करने की योजना बताई गई है। ये निर्धारित लक्ष्य हैं, पूर्णता की पुष्टि नहीं। वास्तविक समयसीमा डिजाइन, टेंडर और निर्माण की प्रगति पर निर्भर करेगी। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि डबल डेकर ब्रिज तैयार होकर जनता के लिए खोल दिया गया है। निर्माण पूरा होने और यातायात शुरू होने की आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही इसकी स्थिति स्पष्ट होगी।


इस ब्रिज से किन इलाकों को मिलेगा फायदा

इस परियोजना से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के तीन मूर्ति चौक, एक मूर्ति चौक, गौर सिटी, शाहबेरी और पर्थला सिग्नेचर ब्रिज के आसपास रहने वाले लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा गाजियाबाद के क्रॉसिंग रिपब्लिक और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर आने-जाने वाले वाहन चालकों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकती है। अभी इन इलाकों से निकलने वाले वाहनों को कई जगह स्थानीय सड़कों और चौराहों से गुजरना पड़ता है, जहां ट्रैफिक का दबाव बढ़ जाता है। डबल डेकर कॉरिडोर तैयार होने के बाद लंबी दूरी के ट्रैफिक को अलग रास्ता मिलने की संभावना है। इससे रोजाना दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों, सोसायटियों के निवासियों और गाजियाबाद-ग्रेटर नोएडा के बीच सफर करने वाले लोगों का समय बच सकता है।


ट्रैफिक जाम की समस्या पर कितना असर पड़ेगा

परियोजना का सबसे बड़ा उद्देश्य ग्रेटर नोएडा वेस्ट और गाजियाबाद के बीच यातायात दबाव कम करना है। शाहबेरी और आसपास के चौराहों पर सड़क की सीमित जगह और स्थानीय ट्रैफिक के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। डबल डेकर रोड बनने से लंबी दूरी का ट्रैफिक स्थानीय सड़कों से अलग हो सकेगा, जिससे जाम कम होने की उम्मीद है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अभी कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में 40 से 50 मिनट तक लग जाते हैं और परियोजना के बाद यह समय काफी घट सकता है। हालांकि, वास्तविक समय की बचत वाहन संख्या, ट्रैफिक प्रबंधन, प्रवेश और निकास मार्गों तथा आसपास की सड़कों की स्थिति पर निर्भर करेगी। इसलिए जाम पूरी तरह खत्म होने की गारंटी अभी नहीं दी जा सकती।


दूसरे चरण का काम कब तक पूरा होगा

पहले चरण में NH-9 से तीन मूर्ति चौक तक कॉरिडोर बनाने की योजना है। दूसरे चरण में इस मार्ग को आगे बढ़ाकर पर्थला सिग्नेचर ब्रिज से जोड़ने का प्रस्ताव है। इससे ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लोगों को पर्थला, गौर सिटी और आसपास के इलाकों से दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की ओर जाने के लिए अधिक सीधा रास्ता मिल सकता है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में दूसरे चरण के निर्माण की अलग और पक्की समयसीमा स्पष्ट नहीं है। इसकी शुरुआत और पूरा होने की तारीख अंतिम डिजाइन, संबंधित प्राधिकरणों की मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्यक्रम तय होने के बाद सामने आएगी। इसलिए दूसरे चरण को लेकर किसी निश्चित तारीख का दावा करना अभी उचित नहीं होगा।


नोएडा के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में इसका महत्व

ग्रेटर नोएडा वेस्ट में आवासीय सोसायटियों और आबादी के बढ़ने के साथ सड़कों पर यातायात का दबाव भी बढ़ा है। ऐसे में डबल डेकर कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं स्थानीय और लंबी दूरी के ट्रैफिक को अलग करने में मदद कर सकती हैं। इससे दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। परियोजना को लेकर विभिन्न प्राधिकरणों की मंजूरी और निर्माण की तैयारी क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की दिशा में एक अहम कदम है। हालांकि, इसका वास्तविक फायदा तभी सामने आएगा जब निर्माण तय गुणवत्ता के साथ पूरा होगा और प्रवेश-निकास मार्गों को आसपास की सड़कों से सही तरीके से जोड़ा 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *