भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के विरोध में उतरे किसान, SKM ने दी राष्ट्रव्यापी आंदोलन की चेतावनी
- Babli Ansari
- 22 Jun, 2026
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर किसान संगठनों ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। संयुक्त किसान मोर्चा और भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने इसे खेती, दुग्ध, मछली और पशुपालन से जुड़े करोड़ों लोगों की आजीविका पर सीधा खतरा बताया है। नोएडा में आयोजित प्रेसवार्ता में राकेश टिकैत ने इस समझौते को 140 करोड़ भारतीयों के साथ धोखा करार दिया। किसान नेताओं का कहना है कि अगर समझौते में अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए रास्ता खुला तो देश के छोटे उत्पादक सबसे पहले चोट खाएंगे। इसी मुद्दे पर 23 जून को दिल्ली में एसकेएम की बैठक बुलाई गई है, जहां आगे की रणनीति तय होगी।
किसानों का आरोप, समझौता बड़े बाजारों के लिए खुला दरवाज़ा
किसान संगठनों का कहना है कि यह डील सिर्फ व्यापार का मामला नहीं है, बल्कि भारतीय कृषि ढांचे की सुरक्षा से जुड़ा सवाल है। जानकारी के मुताबिक एसकेएम ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर मांग की है कि किसी भी व्यापारिक समझौते में किसानों, मछुआरों, डेयरी क्षेत्र और पशुपालकों के हितों की स्पष्ट सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। संगठन का दावा है कि अमेरिकी उत्पाद भारतीय बाजार में सस्ते और बड़े पैमाने पर आएंगे तो घरेलू उत्पादकों को कीमत और प्रतिस्पर्धा दोनों मोर्चों पर नुकसान होगा। यही वजह है कि मोर्चा इसे केवल आयात-निर्यात की डील नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाने वाला कदम बता रहा है।
पृष्ठभूमि में टैरिफ, निर्यात और बाजार पहुंच की खींचतान
यह विवाद ऐसे समय खड़ा हुआ है जब भारत वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत का कृषि निर्यात 2019-20 के 34.5 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 51.1 अरब डॉलर तक पहुंचा है, जबकि वैश्विक व्यापार में देश की हिस्सेदारी अभी भी 3 प्रतिशत से कम मानी जाती है। दूसरी ओर, हाल की रिपोर्टों में चीन और जापान जैसे बाजारों से भारतीय कृषि उत्पादों पर उठी आपत्तियों ने निर्यात नियमों और गुणवत्ता मानकों पर बहस तेज कर दी है। ऐसे में अमेरिका के साथ समझौते को सरकार अपने बाजार विस्तार और व्यापार संतुलन की दिशा में एक कदम मान सकती है, लेकिन किसान संगठनों को डर है कि इस प्रक्रिया में घरेलू कृषि संरक्षण कमजोर पड़ जाएगा।
23 जून की बैठक पर टिकी नजर, आंदोलन का स्वरूप तय होगा
संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ किया है कि 23 जून को होने वाली बैठक में एक संयुक्त कार्ययोजना पर बात होगी और जरूरत पड़ी तो राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रूपरेखा भी सामने लाई जाएगी। राकेश टिकैत ने यह संकेत दिया है कि किसान संगठन अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि गांवों और जिलों में जनसंपर्क बढ़ाकर दबाव बनाएंगे। नोएडा की प्रेसवार्ता के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान इलाकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, यदि समझौते की शर्तों में किसान हितों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने ठोस आश्वासन नहीं दिया तो आने वाले दिनों में सड़क से लेकर पंचायत तक विरोध की आवाज़ और तेज हो सकती है।
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