सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नसीहत: युवा प्रदर्शनकारियों से सख्ती नहीं, संवाद और परामर्श जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र और युवा प्रदर्शन से जुड़े मामलों में पुलिस और प्रशासन को संयम बरतने की सलाह दी है। अदालत ने कहा कि बल प्रयोग से हालात और बिगड़ सकते हैं, इसलिए युवाओं को समझाने और सुनने की जरूरत है।
- Babli Ansari
- 05 Aug, 2026
सुप्रीम कोर्ट ने 'संसद चलो' मार्च और उससे जुड़े हिंसा के आरोपों पर सुनवाई के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने वाली एजेंसियों को महत्वपूर्ण संदेश दिया। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यदि कुछ लोग प्रदर्शन के दौरान हिंसा या पत्थरबाजी भी करते हैं, तब भी प्रशासन को अत्यधिक बल प्रयोग से बचना चाहिए। अदालत का मानना है कि युवाओं को शांत करना, उनकी बात सुनना और उन्हें सही सलाह देना समाज में तनाव कम करने का बेहतर तरीका है।
'काउंसलिंग और संवाद सबसे प्रभावी उपाय'
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे युवाओं को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानकर नहीं देखा जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि युवाओं को काउंसलिंग और मार्गदर्शन की जरूरत होती है। अगर राज्य की ओर से आक्रामक रवैया अपनाया जाएगा तो हालात और बिगड़ सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि सबसे प्रभावी तरीका यह है कि उनकी शिकायतें सुनी जाएं और समझा जाए कि वे आखिर विरोध क्यों कर रहे हैं।
किस याचिका पर हो रही थी सुनवाई?
यह टिप्पणी उस याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसे एक सेवानिवृत्त वायुसेना अधिकारी ने दायर किया है। याचिका में 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च के आयोजकों की जवाबदेही तय करने और कथित हिंसा भड़काने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि आयोजकों के खिलाफ भी जवाबदेही तय होनी चाहिए और ऐसे मामलों में स्पष्ट नीति बनाई जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को पहले से लंबित समान मामले के साथ जोड़कर सुनवाई करने का फैसला किया है।
कोर्ट ने पुलिस को क्या सलाह दी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा हैं और यदि किसी प्रदर्शन के दौरान कोई अप्रिय घटना होती है, तो पुलिस को बहुत सावधानी और संयम के साथ स्थिति संभालनी चाहिए। अदालत ने कहा कि हिंसा रोकने के नाम पर अत्यधिक बल प्रयोग कई बार तनाव और बढ़ा देता है। इसलिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ संवाद और धैर्य भी उतना ही जरूरी है।
अब अगली सुनवाई पर टिकी नजर
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित याचिकाओं को एक साथ जोड़ दिया है। आने वाली सुनवाई में अदालत प्रदर्शन के आयोजकों की जवाबदेही, पुलिस की कार्रवाई और कानून-व्यवस्था से जुड़े अन्य पहलुओं पर विस्तार से विचार करेगी। इस बीच कोर्ट की यह टिप्पणी कानून-व्यवस्था और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन के बीच संतुलन बनाने को लेकर अहम मानी जा रही है।
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