दिल्ली की मतदाता सूची में बड़ा फेरबदल, SIR के बाद 47 लाख से अधिक नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर होने की आशंका
- Babli Ansari
- 18 Aug, 2026
नई दिल्ली। दिल्ली की मतदाता सूची में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR ने बड़ा झटका दिया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आंकड़ों के मुताबिक 1.45 करोड़ मतदाताओं में से करीब 97.47 लाख के गणना प्रपत्र ही जमा और अपलोड हो सके हैं, जबकि 47.6 लाख से ज्यादा नाम 24 अगस्त को आने वाली ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर रह सकते हैं। यह संख्या दिल्ली के कुल मतदाताओं का लगभग एक-तिहाई बैठती है और इसी वजह से चुनावी हलकों में हलचल तेज हो गई है। जिन लोगों ने समय रहते फॉर्म जमा नहीं किए, उन्हें अब दावा-आपत्ति की प्रक्रिया का इंतजार करना होगा। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को प्रकाशित होनी है, लेकिन तब तक कई नामों पर सवाल बना रहेगा।
कितने नाम बाहर और किस श्रेणी में
जानकारी के मुताबिक 47.62 लाख ऐसे मतदाता ‘अनकलेक्टेबल’ श्रेणी में रखे जा सकते हैं। इसमें वे लोग शामिल हैं जो घर पर नहीं मिले, एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो गए, मृत पाए गए, डुप्लीकेट निकले या फिर किसी और वजह से सत्यापित नहीं हो सके। चुनाव अधिकारियों का कहना है कि यह कोई अंतिम कटौती नहीं है, बल्कि ड्राफ्ट चरण की स्थिति है। जो नाम इस बार नहीं दिखेंगे, उनके लिए 24 अगस्त से 23 सितंबर तक दावा-आपत्ति की खिड़की खुलेगी। इस दौरान फॉर्म 6 के साथ नया आवेदन देकर नाम जुड़वाने की कोशिश की जा सकेगी। बूथ स्तर के कर्मचारियों ने एक महीने से ज्यादा समय तक घर-घर जाकर फॉर्म इकट्ठा किए, लेकिन बड़ी संख्या में रिकॉर्ड पूरा नहीं हो सका।
क्यों बढ़ा इतनी बड़ी संख्या का आंकड़ा
सूत्रों के अनुसार दिल्ली में नाम हटने की सबसे बड़ी वजह लोगों का लगातार शिफ्ट होना है। बड़ी संख्या में मतदाता दिल्ली के भीतर ही इलाके बदल चुके हैं या नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद जैसे NCR शहरों में चले गए हैं। कुछ लोग कामकाज या पारिवारिक कारणों से दूसरे राज्यों में भी बस गए हैं, लेकिन पुरानी वोटर एंट्री अब तक सिस्टम में बनी हुई थी। SIR का मकसद ऐसे ही पुराने, दोहराए गए या संदिग्ध रिकॉर्ड को छांटना है। यही वजह है कि इस बार प्रक्रिया को सख्ती से चलाया गया और बूथ स्तर पर भौतिक सत्यापन को प्राथमिकता दी गई। हालांकि इतनी बड़ी संख्या ने यह भी साफ कर दिया कि दिल्ली की मतदाता सूची लंबे वक्त से एक बड़े शोधन की मांग कर रही थी।
अब किस पर पड़ेगा असर
राजनीतिक नजरिए से यह पूरा मामला बेहद संवेदनशील हो गया है। विपक्षी दलों और नागरिक समूहों ने इतनी बड़ी कटौती पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं, जबकि चुनाव आयोग का रुख है कि सूची को शुद्ध करना जरूरी है। जिन लोगों का नाम ड्राफ्ट में नहीं आएगा, उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन समय पर दस्तावेज देने होंगे। दावा-आपत्ति की अवधि में जो आवेदन सही पाए जाएंगे, उन्हें दोबारा जोड़ा जाएगा और आपत्तियों का निपटारा 22 अक्टूबर तक किया जाएगा। इसके बाद 27 अक्टूबर को अंतिम रोल सामने आएगा। साफ है कि असली तस्वीर अभी आनी बाकी है, लेकिन दिल्ली की चुनावी जमीन पर यह SIR अब बड़े बहस का मुद्दा बन चुका है।
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