Gen-Z को साधने BJP का बड़ा प्लान! नितिन नबीन-स्मृति ईरानी को मिली कमान
- Babli Ansari
- 22 Aug, 2026
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी ने देश के युवा मतदाताओं, खासकर Gen Z को साधने के लिए एक अलग और सुनियोजित आउटरीच अभियान की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इसके लिए एक विशेष टीम बनाई गई है, जिसकी कमान राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के पास होगी। इस टीम में स्मृति ईरानी और विनोद तावड़े जैसे बड़े चेहरे भी रखे गए हैं, जबकि गुजरात के मंत्री हर्ष संघवी और छत्तीसगढ़ के मंत्री ओपी चौधरी को भी जिम्मेदारी दी गई है। माना जा रहा है कि पार्टी इस पहल के जरिए युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ उनकी सोच, उम्मीदों और नाराजगी को सीधे समझना चाहती है।
युवाओं के लिए नई राजनीतिक लाइन
सूत्रों के अनुसार बीजेपी का यह कदम केवल औपचारिक संगठनात्मक फेरबदल नहीं है, बल्कि 2029 की बड़ी राजनीतिक लड़ाई से पहले जमीनी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। पार्टी ने Gen Z के लिए अलग संवाद चैनल बनाने का फैसला किया है ताकि युवा सिर्फ सोशल मीडिया पर नहीं, बल्कि कैंपस, कॉलेज, छात्रावास और सीधे संवाद के जरिए पार्टी से जुड़ें। बताया जा रहा है कि टीम का काम यही होगा कि युवाओं के मुद्दे किन जगहों पर सबसे ज्यादा तीखे हैं, कौन-से सवाल बार-बार उठ रहे हैं और किन नारों या नीतियों से नई पीढ़ी कनेक्ट हो रही है। बीजेपी अब तक डिजिटल कैंपेन, शॉर्ट वीडियो और कैंपस-आधारित संपर्क पर जोर देती रही है, लेकिन इस नई कवायद में संवाद को ज्यादा प्रत्यक्ष और संगठित बनाने की कोशिश दिख रही है।
नितिन नबीन की नई टीम पर सबकी नजर
जानकारी के मुताबिक शनिवार को नितिन नबीन ने पार्टी की नई राष्ट्रीय टीम के साथ पहली बैठक भी की, जिसमें संगठनात्मक मजबूती और चुनावी तैयारी पर बात हुई। इसी बैठक के बाद Gen Z आउटरीच वाली लाइन और साफ हुई। पार्टी के भीतर यह संदेश दिया जा रहा है कि युवा वर्ग अब सिर्फ वोट बैंक नहीं, बल्कि राजनीतिक विमर्श तय करने वाली सबसे अहम ताकत बन चुका है। इसी वजह से बीजेपी अपने संवाद का तरीका बदल रही है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अभियान में युवाओं से रोजगार, शिक्षा, कौशल विकास, तकनीक और भविष्य की प्राथमिकताओं पर खुली बातचीत की जाएगी। मकसद यह भी है कि पार्टी की बात युवा भाषा में पहुंचे और नेतृत्व का चेहरा उनके बीच ज्यादा सहज और भरोसेमंद नजर आए।
चुनावी संदेश और संगठनात्मक असर
बीजेपी की इस रणनीति का असर सिर्फ सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहने वाला है। पार्टी चाहती है कि स्कूल-कॉलेजों से लेकर छात्र समुदाय तक उसका संपर्क लगातार बढ़े और युवा कार्यकर्ता सीधे जुड़ाव महसूस करें। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि आने वाले हफ्तों में यह अभियान कई राज्यों में शुरू किया जा सकता है और इसके लिए अलग-अलग नेताओं को अलग क्षेत्रीय जिम्मेदारियां दी जाएंगी। राजनीतिक हलकों में इसे उस कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें बीजेपी नई पीढ़ी के बीच अपनी विचारधारा को ताजा भाषा और नए चेहरों के जरिए पेश करना चाहती है। पार्टी के लिए चुनौती साफ है—युवा मतदाताओं को सिर्फ सुनना नहीं, उन्हें यह भरोसा भी दिलाना कि उनकी बात दिल्ली तक पहुंचेगी।
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