बच्चों को बनाया मां का शिक्षक, स्टूडेंट्स को देते हैं रोज नया असाइनमेंट! असम के राजेश बोरदोलोई को मिला नेशनल अवॉर्ड

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असम के जॉरहाट के शिक्षक राजेश बोरदोलोई को उनके नवाचार ‘Each One Teach One’ के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार मिला है। उनकी पहल में छात्र अपनी माताओं को डिजिटल साक्षरता से लेकर रोजमर्रा के जरूरी काम सिखाते हैं।

बच्चों को बनाया मां का शिक्षक
असम के जोरहाट जिले के शिक्षक राजेश बोरदोलोई को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। उनकी खास पहचान उनकी ऐसी शिक्षण पद्धति से बनी, जिसमें पढ़ाई सिर्फ स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहती। उन्होंने अपने छात्रों को घर पर अपनी माताओं का शिक्षक बनने के लिए प्रेरित किया।
राजेश बोरदोलोई आदर्श ट्राइबल हायर सेकेंडरी स्कूल में भूगोल पढ़ाते हैं। उनके स्कूल के करीब 99 प्रतिशत छात्र मिसिंग जनजातीय समुदाय से हैं और बड़ी संख्या में बच्चे अपने परिवार में पहली पीढ़ी के शिक्षार्थी हैं। ऐसे माहौल में उन्होंने शिक्षा को परिवार और समुदाय से जोड़ने का तरीका अपनाया।

Each One Teach One की पहल
राजेश बोरदोलोई ने कक्षा 10 के छात्रों के लिए Each One Teach One नाम की पहल शुरू की। इसके तहत छात्रों को अपनी माताओं को डिजिटल साक्षरता सिखाने की जिम्मेदारी दी गई। बच्चे अपनी माताओं को मोबाइल फोन चलाने, डिजिटल पेमेंट और ऑनलाइन सेवाओं जैसी जरूरी चीजों के बारे में बताते हैं।
इस पहल के पीछे स्थानीय जरूरत भी थी। आसपास के कई परिवार खेती और सब्जी कारोबार से जुड़े हैं और उन्हें शहर के व्यापारियों के साथ डिजिटल लेनदेन करना पड़ता है। ऐसे में बच्चों के जरिए माताओं को डिजिटल तकनीक से जोड़ने की कोशिश की गई। इससे छात्रों की अपनी समझ भी मजबूत हुई और परिवारों में डिजिटल ज्ञान बढ़ा।

पढ़ाई के साथ सामाजिक बदलाव
बोरदोलोई की पहल सिर्फ डिजिटल साक्षरता तक सीमित नहीं है। स्कूल में कुछ बच्चों के अचानक पढ़ाई छोड़ने के कारणों की पड़ताल के दौरान शिक्षकों को बाल विवाह जैसी सामाजिक समस्या का पता चला। इसके बाद छात्रों और शिक्षकों ने आसपास के गांवों में जागरूकता अभियान चलाए।
छात्रों को स्थानीय संस्कृति और पारंपरिक हुनर से जोड़ने के लिए उन्हें मिसिंग समुदाय के बुनकरों से पारंपरिक बुनाई सीखने का मौका भी दिया जाता है। इसके साथ ही उन्हें यह समझने के लिए प्रेरित किया जाता है कि डिजिटल माध्यमों और सोशल मीडिया के जरिए स्थानीय उत्पादों को बाजार तक कैसे पहुंचाया जा सकता है।

किताबों से बाहर की पाठशाला
बोरदोलोई का मानना है कि शिक्षा का मतलब सिर्फ पाठ्यपुस्तक पढ़ना नहीं है। इसी सोच के तहत उनके छात्र स्थानीय बाजार में जाकर रोजमर्रा के लेनदेन से गणित सीखते हैं। स्कूल में आसपास के परिवारों से लाई गई सब्जियों की बिक्री जैसी गतिविधियों के जरिए भी बच्चों को व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है।
बोरदोलोई ने छात्रों की भाषा और संस्कृति को समझने की कोशिश भी की। चूंकि अधिकांश छात्र घर पर मिसिंग भाषा बोलते हैं, इसलिए उन्होंने खुद भी मिसिंग के शब्द सीखकर बच्चों से संवाद करना शुरू किया।

इन्हीं नवाचारों और समुदाय आधारित शिक्षा के लिए राजेश बोरदोलोई को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 के लिए चुना गया है। उनकी कहानी दिखाती है कि एक शिक्षक सिर्फ कक्षा में पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं होता, बल्कि वह बच्चों के जरिए पूरे परिवार और समाज में बदलाव की शुरुआत कर सकता है।

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