श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आज; 190 साल बाद बन रहा अद्भुत सयोग, जानिए शुभ मुहूर्त और व्रत और पूजन के नियम
- Shiv Kumar
- 16 Aug, 2025
भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रीकृष्ण जन्माष्टमी इस बार बेहद खास संयोग के साथ मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रीकृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि में हुआ था। इस बार भी दोनों का संयोग एक साथ बन रहा है। खास बात यह है कि 190 साल बाद जन्माष्टमी पर अद्वितीय ग्रह योग का निर्माण हो रहा है, जो इस पर्व को और भी शुभ और विशेष बना रहा है। मथुरा से लेकर पूरे देश में जन्माष्टमी की तैयारियां जोरों से चल रही हैं।
जन्माष्टमी की तिथि और शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि का प्रारंभ: शुक्रवार रात 11:49 बजे
अष्टमी तिथि का समापन: शनिवार रात 9:34 बजे
पूजन का शुभ समय: शनिवार मध्यरात्रि से 12:43 बजे तक
अद्भुत संयोग इससे पहले वर्ष 1835 में बना था
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में, सूर्य अपनी स्वराशि सिंह में, गुरु मिथुन में और मंगल कन्या राशि में स्थित रहेंगे। इस स्थिति में गौरी योग, बुध आदित्य योग, वेशी योग, अमृत सिद्धि योग, गजलक्ष्मी योग और राजराजेश्वर योग का निर्माण होगा। ऐसा अद्भुत संयोग इससे पहले वर्ष 1835 में बना था। मान्यता है कि इस योग में व्रत रखकर और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करने वाले भक्तों को संतान सुख, वंशवृद्धि, सुख-शांति और समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
खीरे का विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, जन्माष्टमी पर खीरा काटने की परंपरा भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का प्रतीक मानी जाती है। आधी रात को जब श्रीकृष्ण का जन्म होता है, तब खीरा काटकर उसके बीज निकालने की रस्म नाभि छेदन की क्रिया के रूप में मानी जाती है। खीरे का डंठल गर्भनाल का प्रतीक है, जिसे काटकर माता देवकी के गर्भ से श्रीकृष्ण के अलग होने का संकेत किया जाता है।
व्रत और पूजन के नियम
जन्माष्टमी पर ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
दिन में सोने से बचना चाहिए।
व्रत के दौरान अन्न और नमक का सेवन वर्जित है।
उपवास में दूध, दही, फल, साबूदाना और कुट्टू के आटे से बने व्यंजन ग्रहण किए जा सकते हैं।
घर और कान्हा को कैसे सजाएं
जन्माष्टमी पर घर और मंदिर को फूलों, रंगोली और दीपों से सजाएं।
भगवान कृष्ण के लिए सुंदर पालना सजाकर उन्हें उसमें विराजमान करें।
पालना और झांकी को मोर पंख, फूलों और रंग-बिरंगी सजावटी वस्तुओं से अलंकृत किया जाता है।
वृंदावन की झांकी बनाकर उसमें पेड़, कुटिया और प्राकृतिक दृश्यों को दर्शाया जा सकता है।
माखन मटकी सजाना विशेष शुभ माना जाता है, क्योंकि श्रीकृष्ण को माखन अत्यंत प्रिय है।
कई स्थानों पर गोवर्धन पर्वत की झांकी भी बनाई जाती है।
दीपक जलाकर घर को रोशन करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
Leave a Reply
Your email address will not be published. Required fields are marked *






