सायोनी घोष ने कहा ममता बनर्जी को बाय बाय ! TMC के 19 सांसदों के समर्थन पत्र से ममता बनर्जी की मुश्किलें बढ़ीं
- Babli Ansari
- 12 Jun, 2026
नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस के भीतर राजनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंपे गए एक समर्थन पत्र की चर्चा अब सियासी गलियारों में जोर पकड़ रही है, जिसमें टीएमसी के 19 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक यह पत्र मई में ही दिया गया था, लेकिन इसकी सूची अब सामने आई है। इस कथित समर्थन पत्र में सायोनी घोष, यूसुफ पठान, काकोली घोष दस्तीदार, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी और मिताली बाग जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
समर्थन पत्र में कौन-कौन शामिल
सूत्रों के अनुसार पत्र पर जिन 19 सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं, उनमें खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान, बापी हलदार, डॉ. शर्मिला सरकार, प्रसून बंद्योपाध्याय, जगदीश बर्मा बसुनिया, असित कुमार माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपद सोरेन, दीपक अधिकारी, जून मलिया और पार्थ भौमिक के नाम भी हैं। कहा जा रहा है कि यह सूची अचानक नहीं बनी, बल्कि पिछले कुछ हफ्तों से अंदरखाने इसकी तैयारी चल रही थी। पार्टी के भीतर एक अलग लाइन खड़ी करने की कोशिशों की अटकलें पहले से लगाई जा रही थीं और अब सामने आई सूची ने उन चर्चाओं को और हवा दे दी है।
बताया जा रहा है कि शुरुआती दौर में 20 सांसदों के एकजुट होने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम सूची 19 नामों पर आकर ठहर गई। वजह यह बताई जा रही है कि एक वरिष्ठ सांसद के नाम को लेकर सहमति नहीं बन पाई। इसी कारण कथित अलग गुट का दावा पूरी तरह आकार नहीं ले सका। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि लोकसभा में टीएमसी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है। पार्टी नेतृत्व के लिए यह स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आम चुनाव के बाद संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखना उसके लिए अहम काम है।
पार्टी के भीतर बढ़ते संकेत और आगे की तस्वीर
टीएमसी लंबे समय से भीतरघात, असहमति और नेतृत्व शैली को लेकर चर्चा में रही है। अब सांसदों के इस समर्थन पत्र ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की संसदीय इकाई के भीतर अलग-अलग धड़े सक्रिय हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लोकसभा में उपस्थिति और संसदीय रणनीति को लेकर सांसदों की भूमिका सिर्फ औपचारिक नहीं रहती, इसलिए ऐसे पत्रों का असर भीतर और बाहर दोनों जगह महसूस किया जाता है। ममता बनर्जी के लिए यह भी संदेश माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर संवाद और नियंत्रण की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।
फिलहाल टीएमसी की ओर से इस कथित सूची पर कोई औपचारिक सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन जिस तरह सायोनी घोष और यूसुफ पठान जैसे नाम चर्चा में आए हैं, उसने इस खबर को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि पार्टी नेतृत्व इस मामले को आंतरिक अनुशासन का सवाल मानता है या इसे सिर्फ संसदीय औपचारिकता बताकर टाल देता है। फिलहाल इतना साफ है कि समर्थन पत्र की यह कहानी ममता बनर्जी की राजनीति में एक नई परत जोड़ रही है।
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