लखनऊ में बिजली संकट गहराया, खपत 2017 मेगावाट पार होने के बाद कई इलाकों में आपूर्ति ठप
- Babli Ansari
- 19 Jun, 2026
लखनऊ। राजधानी में गर्मी का दबाव इस कदर बढ़ा कि बिजली व्यवस्था एक बार फिर रात के वक्त लड़खड़ा गई। कई इलाकों में अचानक आपूर्ति ठप होने से लोग उमस और अंधेरे में परेशान रहे, जबकि कुछ जगहों पर उपकेंद्रों के बाहर नाराज उपभोक्ताओं की भीड़ जुट गई। जानकारी के मुताबिक बिजली की खपत 2017 मेगावाट के पार पहुंचते ही नेटवर्क पर दबाव बढ़ गया और अलग-अलग फीडरों में दिक्कत सामने आने लगी। आधी रात के बाद हुई इस गड़बड़ी ने शहर के उन इलाकों की मुश्किलें बढ़ा दीं, जहां पहले से ही लंबे समय से लो-वोल्टेज और ट्रिपिंग की शिकायतें मिल रही थीं।
लोड बढ़ा तो सिस्टम पर पड़ा सीधा असर
सूत्रों के अनुसार शहर में मांग जिस रफ्तार से चढ़ रही है, उसी अनुपात में वितरण व्यवस्था का दबाव भी बढ़ रहा है। लखनऊ के कुछ जोनों में ट्रांसफार्मर और केबल नेटवर्क पर ज्यादा लोड पड़ने से बार-बार ब्रेकडाउन की स्थिति बन रही है। बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के साथ एसी, कूलर और पंखों का इस्तेमाल बढ़ा है, जिससे रात के समय खपत अचानक ऊपर चली जाती है। इसी दौरान किसी एक फीडर में तकनीकी खराबी आ जाए तो उसका असर आसपास की कॉलोनियों तक फैल जाता है। बताया जा रहा है कि कई उपकेंद्रों पर टीमों को देर रात मरम्मत के लिए उतारा गया, लेकिन बढ़े हुए लोड और बार-बार आने वाली दिक्कतों ने काम को आसान नहीं रहने दिया।
लखनऊ के बिजली तंत्र पर यह दबाव अचानक नहीं बना। पिछले कुछ दिनों से तापमान में लगातार बढ़ोतरी के साथ बिजली की मांग नई ऊंचाइयों को छू रही है। गर्मी की लहर में घरेलू उपभोग के साथ व्यावसायिक खपत भी तेज हो जाती है, इसलिए दिन के मुकाबले रात में नेटवर्क पर अलग तरह की मार पड़ती है। कई इलाकों में पुरानी केबल, क्षमता से कम ट्रांसफार्मर और रखरखाव की कमजोरियों की शिकायतें पहले भी उठती रही हैं। इसी बीच शहर की खपत 2017 मेगावाट तक पहुंचना बताता है कि लखनऊ अब उस सीमा पर खड़ा है, जहां थोड़ी-सी तकनीकी चूक भी बड़े पैमाने पर कटौती में बदल सकती है।
उपभोक्ता नाराज, विभाग पर जवाबदेही का दबाव
रात की कटौती से सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हुई जिनके घरों में छोटे बच्चे, बुजुर्ग और मरीज हैं। कई इलाकों में लोग उपकेंद्रों पर फोन मिलाते रहे, लेकिन जवाब देर से मिला। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली जाने पर न तो समय पर सूचना मिलती है और न ही बहाली का भरोसा साफ दिखता है। यही वजह रही कि कुछ स्थानों पर लोगों ने गुस्सा भी जताया और मौके पर हंगामा हुआ। स्थानीय स्तर पर अब सवाल सिर्फ इतनी देर की कटौती का नहीं है, बल्कि इस बात का है कि राजधानी में बढ़ती मांग के हिसाब से व्यवस्था कितनी तैयार है। आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ा तो दबाव और ऊपर जाएगा, ऐसे में विभाग के सामने लाइन सुधारने, ट्रांसफार्मर क्षमता बढ़ाने और शिकायत निस्तारण को तेज करने की बड़ी चुनौती खड़ी है।
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