यूपी बोर्ड में बड़ा बदलाव! 9वीं से 12वीं तक पढ़ाई का पूरा सिस्टम बदलेगा

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योगी सरकार का बड़ा फैसला, अब रटकर नहीं चलेगी पढ़ाई ! अब नंबर नहीं, योग्यता होगी असली पहचान!

उत्तर प्रदेश सरकार ने माध्यमिक शिक्षा में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश के 29 हजार से अधिक यूपी बोर्ड स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक की पढ़ाई के तरीके, मूल्यांकन प्रणाली और शिक्षण व्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किए जाएंगे। इस नई व्यवस्था का लाभ प्रदेश के एक करोड़ से अधिक छात्र-छात्राओं को मिलेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या (SCF) तैयार की जा रही है, जिसके माध्यम से यह तय किया जाएगा कि स्कूलों में क्या पढ़ाया जाए, कैसे पढ़ाया जाए और छात्रों का मूल्यांकन किस आधार पर किया जाए। इसके लिए जुलाई से ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें भारतीय ज्ञान परंपरा को भी विशेष स्थान दिया जाएगा।

चार बड़े बदलावों पर होगा पूरा फोकस

यूपी बोर्ड के अपर सचिव (पाठ्यपुस्तक) डॉ. स्कंद शुक्ल ने बताया कि नई पाठ्यचर्या को तैयार करने के लिए शिक्षा विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। इसका उद्देश्य पढ़ाई को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय अधिक व्यावहारिक, रचनात्मक और छात्र-केंद्रित बनाना है। नई व्यवस्था चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित होगी। पहला, शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया, जिसमें कक्षा में पढ़ाने के तरीके को आधुनिक बनाया जाएगा। दूसरा, मूल्यांकन प्रणाली, जहां केवल अंकों के बजाय छात्र की वास्तविक समझ और क्षमता का आकलन किया जाएगा। तीसरा, शिक्षकों की भूमिका, जिसके तहत उन्हें नई शिक्षा पद्धति के अनुरूप विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। चौथा, विद्यालयी वातावरण और संसाधन, जिसमें स्कूलों की प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अन्य सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर रहेगा।

भारतीय ज्ञान परंपरा और NEP-2020 के अनुरूप होगा नया ढांचा

नई राज्य स्तरीय पाठ्यचर्या राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के सिद्धांतों पर आधारित होगी। इसमें रटकर पढ़ाई करने की परंपरा से हटकर कॉन्सेप्चुअल लर्निंग, क्रिटिकल थिंकिंग और प्रैक्टिकल नॉलेज को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही भारतीय ज्ञान परंपरा को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा में अच्छे अंक लाना नहीं, बल्कि छात्रों को रोजगार, जीवन कौशल और समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए तैयार करना होगा। नई व्यवस्था 5+3+3+4 शिक्षा संरचना के अनुरूप विकसित की जा रही है, जिससे विद्यार्थियों को उनकी उम्र और सीखने की क्षमता के अनुसार शिक्षा मिल सके।

जुलाई से शुरू होंगी कार्यशालाएं, छात्रों और शिक्षकों दोनों पर पड़ेगा असर

नई व्यवस्था लागू करने के लिए जुलाई से प्रदेशभर में ऑनलाइन और ऑफलाइन कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इनमें शिक्षा विशेषज्ञ, शिक्षक और विषय विशेषज्ञ शामिल होंगे। शिक्षकों को नई शिक्षण तकनीकों और मूल्यांकन प्रणाली का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे छात्रों को आधुनिक और व्यवहारिक तरीके से पढ़ा सकें। वहीं छात्रों के लिए परीक्षाओं को केवल अंक आधारित व्यवस्था से हटाकर उनकी वास्तविक प्रतिभा, समझ और कौशल का मूल्यांकन किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से प्रदेश के एक करोड़ से अधिक छात्रों को समान अवसर मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था अधिक प्रभावी, समावेशी तथा भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बन सकेगी।

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