1 से 15 जुलाई तक चलेगा मिशन! स्कूल चलो अभियान के दूसरे चरण की शुरुआत

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योगी सरकार का बड़ा शिक्षा अभियान! 'स्कूल चलो अभियान-2026' के दूसरे चरण की शुरुआत, हर बच्चे तक पहुंचेगी शिक्षा

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सहारनपुर से 'स्कूल चलो अभियान-2026' के दूसरे चरण का शुभारंभ किया। इस्माइलपुर स्थित कंपोजिट विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिक से अधिक बच्चों को विद्यालयों से जोड़ने का आह्वान किया। यह विशेष अभियान 1 जुलाई से 15 जुलाई तक पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक पात्र बच्चे का विद्यालय में नामांकन सुनिश्चित किया जाए। इस दौरान प्रदेश के राज्य मंत्री (बेसिक शिक्षा) संदीप सिंह भी मौजूद रहे।

नामांकन बढ़ाने के लिए जारी हुई 163.60 लाख रुपये की धनराशि

अभियान के सफल संचालन के लिए सरकार ने 163.60 लाख रुपये की वित्तीय सीमा जारी की है। इस राशि का उपयोग विशेष नामांकन अभियान, जनजागरूकता कार्यक्रम और अन्य आवश्यक गतिविधियों पर किया जाएगा। सभी जिलों में अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि विद्यालयों में अधिक से अधिक बच्चों का प्रवेश सुनिश्चित किया जाए। इसके साथ ही स्कूलों में शौचालय, पेयजल, बिजली, फर्नीचर और लाइब्रेरी जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा की जाएगी।

बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर सरकार का जोर

सरकार ने माना है कि कई परिषदीय विद्यालयों में अभी भी आधारभूत सुविधाओं की कमी है। ऐसे विद्यालयों में शौचालय, बिजली, पेयजल, पुस्तकालय, फर्नीचर और मिड-डे मील जैसी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि "सशक्त शिक्षा ही समृद्ध उत्तर प्रदेश की नींव है।" उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्कूलों की आवश्यक सुविधाओं को जल्द पूरा किया जाए ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सके।

बच्चों को बांटी गई शैक्षणिक सामग्री, जनभागीदारी पर रहेगा जोर

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को स्कूल बैग, किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी वितरित की। उन्होंने बच्चों और अभिभावकों से नियमित रूप से विद्यालय आने और शिक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की। अभियान के दौरान पूरे प्रदेश में रैलियां, जनसंपर्क अभियान और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक बच्चों का स्कूलों में नामांकन हो सके। सरकार का मानना है कि जनभागीदारी के माध्यम से इस अभियान को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

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