अंबेडकर नगर को योगी सरकार का ₹707 करोड़ का तोहफा, विकास परियोजनाओं की सौगात
- Babli Ansari
- 06 Aug, 2026
अंबेडकरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को जिले को 707 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं की बड़ी सौगात देने जा रहे हैं। गोविंद साहब धाम में होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और पुलिस-प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर डटी हुई हैं। जिला प्रशासन के मुताबिक पहले जहां आलापुर और जलालपुर विधानसभा क्षेत्र की योजनाएं तय थीं, वहीं अब इब्राहिमपुर क्षेत्र की परियोजनाएं भी जोड़ दी गई हैं। इससे कार्यक्रम का दायरा और बड़ा हो गया है। जिले की सड़कों, शैक्षणिक ढांचे, स्वास्थ्य सेवाओं और पेयजल योजनाओं को इससे सीधी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
गोविंद साहब धाम में होगा बड़ा कार्यक्रम
जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री दोपहर बाद गोविंद साहब धाम पहुंचेंगे और हेलीपैड पर उतरने के बाद जनसभा को संबोधित करेंगे। प्रशासन ने पूरे कार्यक्रम स्थल को सुरक्षा के लिहाज से चाक-चौबंद कर दिया है। आसपास के इलाकों में वाहनों की आवाजाही नियंत्रित की गई है और कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने वाले रास्तों पर पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री 194 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करेंगे, जिनकी कुल लागत 707 करोड़ रुपये है। इनमें 158 परियोजनाओं का लोकार्पण और 36 का शिलान्यास शामिल है। तीनों विधानसभा क्षेत्रों में योजनाओं का बंटवारा इस तरह किया गया है कि हर इलाके को विकास का हिस्सा मिले।
सूत्रों के अनुसार आलापुर, जलालपुर और इब्राहिमपुर क्षेत्र में कुल 69 परियोजनाएं शामिल की गई हैं, जिन पर 217 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होगा। प्रशासनिक हलकों में इसे जिला स्तर पर अब तक के सबसे बड़े कार्यक्रमों में गिना जा रहा है। पहले सिर्फ दो विधानसभा क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित कार्यक्रम को बाद में और व्यापक बनाया गया। इससे यह संकेत भी मिला है कि सरकार इस दौरे को केवल औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राजनीतिक और विकासात्मक संदेश के तौर पर भी इस्तेमाल करना चाहती है। स्थानीय अधिकारियों ने दावा किया है कि सभी प्रस्तावित योजनाओं की फाइलें और तकनीकी मंजूरियां समय रहते पूरी कर ली गई हैं।
दौरे से पहले सख्त हुई प्रशासनिक कार्रवाई
मुख्यमंत्री के दौरे से ठीक पहले गोविंद साहब धाम और उसके आसपास अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई भी तेज कर दी गई। बताया जा रहा है कि तहसील प्रशासन ने बुलडोजर चलवाकर कई अवैध दुकानों को हटाया और सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया। यह कार्रवाई करीब 48 घंटे पहले शुरू की गई थी, ताकि मुख्य कार्यक्रम के दिन किसी तरह की अव्यवस्था न हो। स्थानीय स्तर पर यह कदम चर्चा में रहा, क्योंकि धार्मिक और सार्वजनिक महत्व वाले इस स्थल पर लंबे समय से अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान से न सिर्फ स्थल की सूरत बदलेगी, बल्कि आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं और आम लोगों की आवाजाही भी आसान होगी।
राज्य सरकार हाल के महीनों में प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बड़े पैमाने पर विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर रही है। अंबेडकरनगर का यह दौरा उसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पहले भी मुख्यमंत्री कई जिलों में सैकड़ों करोड़ की योजनाओं के जरिए स्थानीय आधारभूत ढांचे को मजबूत करने का संदेश दे चुके हैं। ग्रामीण विकास, सड़क नेटवर्क, सामाजिक कल्याण और बुनियादी सुविधाओं पर सरकार की प्राथमिकता हालिया बजट आवंटनों में भी साफ दिखी है। ऐसे में अंबेडकरनगर का कार्यक्रम सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि पूर्वांचल और आसपास के जिलों में विकास गति बढ़ाने की सरकार की रणनीति का अहम पड़ाव बनकर देखा जा रहा है।
स्थानीय उम्मीदें और राजनीतिक संदेश
जिले में इस कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल है। भाजपा संगठन और प्रशासनिक मशीनरी, दोनों ने इसे भव्य बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। स्थानीय लोगों की नजर अब इस पर टिकी है कि घोषित परियोजनाएं किस रफ्तार से जमीन पर उतरती हैं। सड़क, पेयजल, स्कूलों की मरम्मत, स्वास्थ्य केंद्रों का उन्नयन और संपर्क मार्गों के निर्माण जैसी योजनाएं सीधे जनता से जुड़ी हैं, इसलिए इनके नतीजे जल्दी दिखने की उम्मीद की जा रही है। ग्रामीण इलाकों में लोग लंबे समय से बेहतर सड़क और पानी की समस्या उठाते रहे हैं, ऐसे में इन घोषणाओं से आस भी बढ़ी है और दबाव भी।
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा घेरा और मंच प्रबंधन पर विशेष नजर रखी जा रही है। कार्यक्रम स्थल के आसपास फोर्स की अतिरिक्त तैनाती की गई है और अधिकारियों को लगातार मौके पर बने रहने के निर्देश दिए गए हैं। दूसरी ओर, सरकार इस दौरे के जरिए यह संदेश देना चाहती है कि विकास योजनाएं सिर्फ कागज पर नहीं, बल्कि जिलों तक पहुंच रही हैं। अंबेडकरनगर जैसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अहम जिले में यह दौरा आने वाले दिनों की रणनीति का भी संकेत माना जा रहा है, जहां विकास और संगठन दोनों मोर्चों पर सरकार अपनी पकड़ मजबूत दिखाना चाहती है।
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