गोरखपुर में दर्दनाक हादसा! मैजिक ने खेलते बच्चों को कुचला, एक की मौत
- Babli Ansari
- 31 Aug, 2026
गोरखपुर। शहर के एक इलाके में सोमवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया जब खेलते हुए दो छोटे बच्चे तेज रफ्तार मैजिक वाहन की चपेट में आ गए। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने फौरन उन्हें अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान एक बच्चे ने दम तोड़ दिया, जबकि दूसरा बच्चे की हालत नाजुक बनी हुई है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी। हादसे ने एक बार फिर शहर में तेज रफ्तार और लापरवाही से चल रहे व्यावसायिक वाहनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हादसा कैसे हुआ
जानकारी के मुताबिक, हादसा उस वक्त हुआ जब दोनों बच्चे सड़क किनारे खेल रहे थे। उसी दौरान मैजिक वाहन वहां से गुजरा और बच्चों को कुचल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ड्राइवर ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया था, जिससे यह दर्दनाक हादसा हुआ। आसपास मौजूद लोग तुरंत मौके पर दौड़े और बच्चों को उठाकर नजदीकी अस्पताल ले गए। कुछ ही देर में एक बच्चे की मौत की खबर आई, जिससे परिवार में कोहराम मच गया। दूसरे घायल बच्चे को डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद रेफर कर दिया है। पुलिस ने चालक की भूमिका और वाहन की रफ्तार को लेकर शुरुआती जांच शुरू कर दी है।
इलाके में गुस्सा और सदमा
हादसे के बाद मोहल्ले में मातम जैसा माहौल है। परिजन बार-बार अस्पताल और पुलिस चौकी के बीच दौड़ते दिखे। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस सड़क पर भारी वाहनों की आवाजाही अक्सर तेज रहती है और कई बार शिकायत के बावजूद गति पर लगाम नहीं लगती। हादसे ने बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है। मौके पर जुटी भीड़ ने प्रशासन से मांग की कि ऐसे रिहायशी इलाकों में वाहनों की रफ्तार पर सख्ती हो और निगरानी बढ़ाई जाए। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई होगी।
सड़क सुरक्षा पर फिर सवाल
यह हादसा सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि शहरों में बेलगाम दौड़ते छोटे व्यावसायिक वाहनों की उस हकीकत को भी सामने लाता है, जो हर दिन जोखिम बढ़ा रही है। गोरखपुर समेत कई शहरों में ऐसे वाहन बिना तय गति सीमा और कई बार बिना पर्याप्त निगरानी के चलते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, स्कूलों, बाजारों और रिहायशी गलियों के आसपास ट्रैफिक नियंत्रण कमजोर है, जिससे बच्चों और बुजुर्गों की जान पर लगातार खतरा बना रहता है। प्रशासनिक स्तर पर अब देखना होगा कि इस मामले में सिर्फ बयानबाजी होती है या फिर सड़क सुरक्षा को लेकर कोई ठोस कदम उठाए जाते हैं।
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