कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल फिर भी हार्ट अटैक का खतरा, इन 5 चीजों से रहें सावधान

top-news
सामान्य कोलेस्ट्रॉल होने के बाद भी हार्ट अटैक का खतरा बना रह सकता है। डॉक्टरों ने बताया है कि उम्र, परिवारिक इतिहास, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की खराबी और साइलेंट प्लाक जैसे कारण कई बार जांच में पकड़ में नहीं आते।

नई दिल्ली। सामान्य कोलेस्ट्रॉल रिपोर्ट देखकर राहत की सांस लेना कई लोगों के लिए भारी पड़ सकता है। देश-विदेश की ताजा मेडिकल रिपोर्टों और विशेषज्ञों की चेतावनियों से साफ है कि हार्ट अटैक का खतरा सिर्फ एलडीएल या कुल कोलेस्ट्रॉल से तय नहीं होता। उम्र बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, किडनी की कमजोरी, मोटापा, पारिवारिक इतिहास और नसों में छिपी हुई प्लाक कई बार लंबे समय तक बिना लक्षण के बढ़ती रहती हैं। यही वजह है कि कई मरीज पहली बार तब पकड़ में आते हैं जब सीने में दर्द या अचानक कार्डियक इवेंट हो चुका होता है।


साइलेंट प्लाक और छिपा हुआ खतरा

ताजा रिपोर्टों में सबसे बड़ा संकेत साइलेंट एथेरोस्क्लेरोसिस को लेकर है। कई स्टडीज में पाया गया है कि युवाओं में भी धमनियों के भीतर चर्बी की परतें बहुत पहले बनना शुरू हो जाती हैं, जबकि बाहर से व्यक्ति पूरी तरह ठीक दिखता है। ब्राजील और यूरोप से आई रिपोर्टों के मुताबिक 20 की उम्र के बाद ही प्लाक दिखने लगती है और 40 के आसपास पुरुषों का बड़ा हिस्सा तथा महिलाओं का भी एक अहम वर्ग बिना किसी लक्षण के इस बीमारी के साथ जी रहा होता है। यही वह जगह है जहां सामान्य कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट भ्रम पैदा करती है। डॉक्टरों का कहना है कि अगर ब्लड प्रेशर, शुगर, वजन, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास को साथ न देखा जाए तो असली जोखिम छूट सकता है।

कार्डियोलॉजी विशेषज्ञों के मुताबिक समस्या सिर्फ नंबर कम या ज्यादा होने की नहीं है, बल्कि यह है कि शरीर के भीतर प्लाक कितनी तेजी से बन रही है और कब फट सकती है। हाल के अंतरराष्ट्रीय आकलनों में एएएचए की ओर से जारी जोखिम गणना मॉडल भी उम्र, ब्लड प्रेशर, किडनी फंक्शन, डायबिटीज, स्मोकिंग और फैमिली हिस्ट्री को अहम मानता है। यानी जांच की मेज पर सिर्फ कोलेस्ट्रॉल नहीं, पूरी प्रोफाइल देखनी होती है। कई डॉक्टर अब यह साफ कह रहे हैं कि जिन लोगों के परिवार में कम उम्र में हार्ट अटैक का इतिहास रहा है, उनके लिए सामान्य रेंज वाली रिपोर्ट भी सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।


कौन से कारण सबसे ज्यादा चुपचाप वार करते हैं

रिपोर्टों में डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को हार्ट अटैक के सबसे भरोसेमंद लेकिन खामोश दुश्मन बताया गया है। ब्लड शुगर लंबे वक्त तक बढ़ा रहे तो रक्तवाहिनियों की अंदरूनी परत कमजोर पड़ती है और प्लाक जल्दी जमने लगती है। इसी तरह 130/80 से ऊपर का लगातार दबाव दिल पर बोझ बढ़ाता है। कई अंतरराष्ट्रीय कार्डियो रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में मरीजों का एलडीएल तय लक्ष्य से ऊपर रहता है, जबकि उन्हें अपने खतरे का अंदाजा तक नहीं होता। यूरोपीय और अमेरिकी दिशानिर्देशों में अब हाई-रिस्क मरीजों के लिए एलडीएल के लक्ष्य पहले से काफी नीचे रखे जा रहे हैं।

महिलाओं में भी खतरा अलग तरीके से सामने आता है। हालिया अमेरिकी रिपोर्ट में बताया गया कि कई महिलाओं में हार्ट अटैक से पहले थकान, बेचैनी और कमजोरी जैसे संकेत दिखते हैं, जिन्हें वे अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। दूसरी ओर, किडनी की कमजोरी, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान और कुछ जेनेटिक स्थितियां जैसे फैमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया खतरे को कई गुना बढ़ा देती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रिगर एक नहीं, कई होते हैं और वे एक-दूसरे के असर को और तेज कर देते हैं। इसलिए रूटीन चेकअप में लिपिड प्रोफाइल के साथ शुगर, बीपी, किडनी फंक्शन और परिवारिक इतिहास की पड़ताल जरूरी है।


अब आगे क्या, और लोगों को क्या करना चाहिए

दिल की बीमारी को लेकर अब मेडिकल सिस्टम भी ज्यादा आक्रामक स्क्रीनिंग की तरफ बढ़ रहा है। कुछ देशों में फार्मेसी स्तर पर तेज कोलेस्ट्रॉल टेस्ट शुरू किए जा रहे हैं, ताकि शुरुआती मरीज समय रहते पकड़े जा सकें। भारत में भी डॉक्टर बार-बार यही कह रहे हैं कि 30 की उम्र के बाद, और खासकर जिनके घर में हार्ट अटैक का इतिहास है, उनके लिए सालाना दिल की जांच सामान्य आदत बननी चाहिए। हाल की रिपोर्टों में यह बात जोर देकर सामने आई है कि रोकथाम का असली मोर्चा अस्पताल नहीं, घर और लाइफस्टाइल है।

सूत्रों के अनुसार दिल की बीमारी के बढ़ते मामलों ने यह साफ कर दिया है कि सिर्फ एक रिपोर्ट देखकर सुकून पाल लेना खतरनाक हो सकता है। सीने में भारीपन, सांस फूलना, असामान्य थकान, पसीना, जबड़े या बांह में दर्द जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। डॉक्टरों का कहना है कि संतुलित खानपान, रोजाना चलना-फिरना, वजन पर नियंत्रण, धूम्रपान से दूरी और शुगर-बीपी की कड़ी निगरानी ही सबसे मजबूत ढाल है। सामान्य कोलेस्ट्रॉल अगर बाकी जोखिमों के साथ जुड़ा हो, तो वह सुरक्षित पास नहीं, सिर्फ अधूरी तस्वीर साबित हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *