बिना बुखार के भी हो सकता है स्वाइन फ्लू, खांसी-जुकाम को न करें नजरअंदाज, जानें किन लक्षणों पर रहें सतर्क
- Shiv Kumar
- 04 Sep, 2026
एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू का खतरा इस समय सिर्फ दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में इसके मामले सामने आ रहे हैं। अगस्त के अंत तक दिल्ली में संक्रमितों की संख्या 3200 से अधिक पहुंच गई थी। वहीं, 2 सितंबर तक उत्तर प्रदेश में प्रयोगशाला जांच में एच1एन1 के 685 मामलों की पुष्टि हो चुकी थी। कुछ राज्यों से संक्रमितों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ी है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण हल्के रहते हैं। फिर भी पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों, मधुमेह के मरीजों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
हर बार बुखार आए, यह जरूरी नहीं
स्वाइन फ्लू इन्फ्लुएंजा-ए वायरस का एक प्रकार है और तेज बुखार को इसके आम लक्षणों में गिना जाता है। हालांकि हर संक्रमित व्यक्ति को बुखार हो, यह जरूरी नहीं है। अमेरिकी रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र के अनुसार, कुछ लोगों में फ्लू से जुड़े सांस संबंधी लक्षण बिना बुखार के भी दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि अगर किसी व्यक्ति को बुखार नहीं है, लेकिन लगातार खांसी, गले में दर्द, नाक बहने या बंद होने, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान जैसी शिकायत हो रही है तो इसे केवल सामान्य सर्दी-जुकाम समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
लक्षणों से अकेले एच1एन1 की पहचान मुश्किल
विशेषज्ञों के मुताबिक, सिर्फ एक लक्षण के आधार पर यह तय करना मुश्किल है कि व्यक्ति को एच1एन1 संक्रमण है या नहीं। अलग-अलग लोगों में इसके लक्षण अलग तरह से दिखाई दे सकते हैं। बुजुर्गों में फ्लू के दौरान बुखार न होने के बावजूद अन्य लक्षण सामने आ सकते हैं। इनमें भूख कम लगना भी शामिल हो सकता है। ऐसे में उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है। खासकर जिन लोगों को पहले से कोई पुरानी बीमारी है, उन्हें सांस से जुड़े लक्षणों को लेकर ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत होती है।
बच्चों में उल्टी और दस्त भी हो सकते हैं
स्वाइन फ्लू के लक्षण केवल बुखार, खांसी या गले में दर्द तक सीमित नहीं रहते। बच्चों में संक्रमण के दौरान उल्टी और दस्त की शिकायत भी अधिक देखी जा सकती है। इसलिए बच्चों में ऐसे लक्षण दिखाई देने पर इसे केवल पेट की सामान्य समस्या मानकर छोड़ना ठीक नहीं है। वहीं, मधुमेह के मरीजों और अन्य पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोगों में संक्रमण गंभीर होने का खतरा अधिक हो सकता है। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को भी लक्षण दिखाई देने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बीमारी की स्थिति को समझने में मदद कर सकता है।
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