बहुत गर्म चाय-कॉफी से रहें सावधान, नियमित सेवन बढ़ा सकता है एसोफैगस कैंसर का खतरा
- Shiv Kumar
- 15 Sep, 2026
भारत में चाय और कॉफी पीने वालों की संख्या काफी ज्यादा है और कई लोग इसे बहुत गर्म पीना पसंद करते हैं। अगर आपकी भी आदत चाय या कॉफी को तुरंत और बेहद गर्म पीने की है तो अब थोड़ा सावधान होने की जरूरत है। हाल ही में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन में बहुत गर्म पेय पदार्थों और ग्रासनली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच संबंध पाया गया है। शोधकर्ताओं ने करीब 9.77 लाख लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। अध्ययन में पाया गया कि जो लोग अपने पेय को बहुत गर्म पीना पसंद करते थे, उनमें सामान्य या गुनगुने पेय पसंद करने वालों की तुलना में ग्रासनली के इस प्रकार के कैंसर का जोखिम करीब तीन गुना अधिक था। वहीं, रोजाना छह या उससे ज्यादा गर्म पेय पीने वालों में छह से कम पेय लेने वालों की तुलना में जोखिम 71 प्रतिशत अधिक पाया गया। अध्ययन 8 सितंबर 2026 को इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित हुआ है।
करीब 10 लाख लोगों पर किया गया अध्ययन
शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के दो बड़े समूहों के 977,282 वयस्कों के आंकड़ों का अध्ययन किया। इनमें मिलियन वुमन स्टडी और यूके बायोबैंक के प्रतिभागी शामिल थे। औसतन 11 से 14 साल तक प्रतिभागियों के स्वास्थ्य पर नजर रखी गई। इस दौरान ग्रासनली के कैंसर के 2,348 मामले सामने आए, जिनमें 1,045 मामले स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के थे। शोधकर्ताओं ने लोगों से उनके गर्म पेय पीने की मात्रा और पसंदीदा तापमान के बारे में जानकारी ली। करीब 43 से 44 प्रतिशत प्रतिभागियों ने रोजाना छह या उससे ज्यादा गर्म पेय पीने की बात कही, जबकि करीब 15 प्रतिशत लोग पेय को बहुत गर्म पसंद करते थे।
बहुत गर्म पेय से जोखिम तीन गुना से ज्यादा
अध्ययन में पेय के तापमान और ग्रासनली के स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के बीच स्पष्ट संबंध सामने आया। गर्म पेय पसंद करने वालों में गुनगुने पेय पसंद करने वालों की तुलना में जोखिम करीब 79 प्रतिशत अधिक था। वहीं, बहुत गर्म पेय पसंद करने वालों में यह जोखिम करीब 3.17 गुना पाया गया। शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि रोजाना छह या उससे ज्यादा गर्म पेय लेने वालों में छह से कम पेय पीने वालों की तुलना में जोखिम 71 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, अध्ययन में ग्रासनली के दूसरे प्रमुख प्रकार एडेनोकार्सिनोमा के साथ पेय के तापमान का ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला।
चाय-कॉफी छोड़ने की नहीं, तापमान घटाने की सलाह
शोध के नतीजे यह नहीं कहते कि लोगों को चाय या कॉफी पूरी तरह छोड़ देनी चाहिए। अध्ययन का मुख्य संकेत पेय के तापमान और उसकी मात्रा को लेकर है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, बहुत गर्म पेय से होने वाली बार-बार की गर्मी संबंधी चोट ग्रासनली की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकती है और लंबे समय में कैंसरकारी प्रक्रियाओं में भूमिका निभा सकती है। अध्ययन में सीधे पेय का तापमान नहीं मापा गया था, बल्कि लोगों से उनके पसंदीदा तापमान के बारे में पूछा गया था। इसलिए किसी एक निश्चित तापमान को सभी के लिए सुरक्षित सीमा मानना उचित नहीं होगा। बेहतर है कि चाय या कॉफी को थोड़ा ठंडा होने दिया जाए और उसे बहुत गर्म अवस्था में पीने से बचा जाए।
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