तकिया मोड़कर सोते हैं तो सावधान! गर्दन और रीढ़ पर पड़ सकता है असर, जानें सही तरीके से सोने का तरीका

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तकिए को मोड़कर या जरूरत से ज्यादा ऊंचा करके सोने की आदत शरीर के अलाइनमेंट को प्रभावित कर सकती है। इससे गर्दन और पीठ में खिंचाव, कंधे में भारीपन, हाथों में झनझनाहट और कुछ लोगों में सांस से जुड़ी परेशानी बढ़ सकती है। सही ऊंचाई वाला तकिया इस्तेमाल करना जरूरी है।

रात में आरामदायक नींद के लिए सही तकिया चुनना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी उसका सही तरीके से इस्तेमाल करना भी है। कई लोग गर्दन को ज्यादा ऊंचाई देने के लिए तकिए को मोड़कर या दोहरा करके सोते हैं। कुछ लोगों की यह आदत मोबाइल देखने या टीवी देखने के दौरान भी बन जाती है। हालांकि, आपके दिए गए स्वास्थ्य संबंधी कंटेंट के मुताबिक, लंबे समय तक इस तरह सोने से गर्दन, रीढ़, सांस और कंधों से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं। तकिए को मोड़ने से सिर सामान्य स्थिति से काफी ऊपर चला जाता है और गर्दन आगे की तरफ झुक सकती है। इससे सोते समय शरीर का प्राकृतिक अलाइनमेंट बिगड़ने की संभावना रहती है। इसलिए सिर्फ आराम महसूस होने के कारण तकिए को बार-बार मोड़कर सोना सही आदत नहीं मानी जाती।


गर्दन पर लगातार बना रह सकता है दबाव

तकिए को फोल्ड करके सोने पर सिर और गर्दन की ऊंचाई सामान्य से ज्यादा हो जाती है। इससे गर्दन आगे की तरफ झुकने लगती है और लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने के कारण मांसपेशियों पर खिंचाव बना रह सकता है। सुबह उठने के बाद गर्दन में अकड़न, भारीपन या उसे घुमाने में परेशानी महसूस हो सकती है। अगर रोजाना लंबे समय तक गर्दन गलत पोजीशन में रहती है तो सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और गर्दन की डिस्क से जुड़ी दिक्कतों का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए तकिया ऐसा होना चाहिए जो सिर को जरूरत से ज्यादा ऊपर उठाने के बजाय गर्दन के प्राकृतिक कर्व को सहारा दे।


रीढ़ की हड्डी का अलाइनमेंट भी बिगड़ सकता है

सोते समय शरीर की पोजीशन का असर रीढ़ की हड्डी पर भी पड़ता है। रीढ़ की प्राकृतिक बनावट को ध्यान में रखते हुए सिर, गर्दन और पीठ का संतुलित रहना जरूरी है। बहुत ऊंचा या मोड़ा हुआ तकिया इस्तेमाल करने पर सिर ऊपर उठ जाता है, जिससे ऊपरी पीठ और कमर की स्थिति प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक गलत अलाइनमेंट में सोने की आदत से कमर में जकड़न, पीठ दर्द और डिस्क पर अतिरिक्त दबाव जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। खासतौर पर अगर सुबह उठने के बाद लगातार कमर या पीठ में दर्द रहता है तो सोने की मुद्रा और तकिए की ऊंचाई पर ध्यान देना जरूरी है।


सांस लेने में परेशानी और खर्राटे बढ़ सकते हैं

तकिया ज्यादा ऊंचा होने पर ठुड्डी छाती की तरफ झुक सकती है। इससे गर्दन की स्थिति बदलने के कारण सांस लेने का रास्ता प्रभावित हो सकता है। कुछ लोगों में इसका असर खर्राटों के रूप में दिखाई दे सकता है। जिन लोगों को पहले से सांस संबंधी परेशानी या स्लीप एपनिया जैसी समस्या है, उन्हें सोने की मुद्रा को लेकर खास सावधानी बरतनी चाहिए। रात में सांस लेने में परेशानी, घुटन या बार-बार नींद खुलने जैसी समस्या हो तो इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर रहता है।


कंधे और हाथ में सुन्नपन की शिकायत

ऊंचे तकिए पर सोने से कंधों की स्थिति भी बदल सकती है। कंधे अंदर की ओर आने और हाथ की नसों पर दबाव पड़ने से कुछ लोगों को सुबह उठने पर कंधे में भारीपन या हाथ में सुन्नपन महसूस हो सकता है। उंगलियों में झनझनाहट या सुई चुभने जैसा अहसास भी हो सकता है। अगर यह परेशानी बार-बार होती है तो सोने की पोजीशन के साथ तकिए की ऊंचाई पर भी ध्यान देना चाहिए। लंबे समय तक कंधे पर दबाव बने रहने से कंधे की गतिशीलता प्रभावित होने की समस्या हो सकती है।


कैसा तकिया इस्तेमाल करना चाहिए?

तकिया न तो बहुत सख्त होना चाहिए और न ही इतना मुलायम कि सिर पूरी तरह धंस जाए। सामान्य तौर पर ऐसा तकिया बेहतर माना जाता है जो गर्दन के प्राकृतिक कर्व को सहारा दे और सोते समय गर्दन, कंधे और रीढ़ को संतुलित स्थिति में रखे। दिए गए कंटेंट के अनुसार 4 से 6 इंच के आसपास ऊंचाई वाला तकिया इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि सही ऊंचाई व्यक्ति की सोने की मुद्रा और शरीर की बनावट पर निर्भर करती है। पीठ के बल या करवट लेकर सोने की कोशिश करें और पेट के बल सोने से बचें। तकिए को नियमित रूप से साफ रखें, धूप दिखाएं और उसकी स्थिति खराब होने पर बदल दें। यदि गर्दन, कमर, कंधे या सांस से जुड़ी परेशानी लगातार बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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