नोएडा में प्रदूषण के चलते 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक, चिल्ला एलिवेटेड रोड समेत सात बड़ी परियोजनाओं का काम प्रभावित

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नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण पांच से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक लगाई गई है। इससे चिल्ला एलिवेटेड रोड, सेक्टर-62 स्काईवॉक, सलारपुर पुल, जापानी पार्क और सड़क मरम्मत समेत कई विकास परियोजनाओं की समयसीमा प्रभावित होने की आशंका जताई गई है।

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के नोएडा में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अब शहर की विकास परियोजनाओं पर भी पड़ने लगा है। प्रदूषण नियंत्रण के लिए पांच नवंबर से 20 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर रोक लगाए जाने से करीब छह से सात बड़ी परियोजनाओं का काम प्रभावित होने की आशंका है। इनमें चिल्ला एलिवेटेड रोड, यमुना तटबंध की मरम्मत, सेक्टर-62 में स्काईवॉक का निर्माण और सलारपुर में नाले पर बनाए जा रहे पुल शामिल हैं। इसके अलावा सेक्टर-94 में विकसित किए जा रहे जापानी पार्क, सेक्टर-62 के डी-पार्क के सुंदरीकरण और शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम भी प्रभावित होगा। इनमें कई परियोजनाएं पहले से ही निर्धारित समय से पीछे चल रही हैं। ऐसे में निर्माण कार्यों पर पाबंदी लगने से इनके पूरा होने में और देरी हो सकती है। नोएडा प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण फैलाने वाले निर्माण कार्यों को रोकने के निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। खासकर खुदाई और धूल उड़ाने वाले कामों पर निगरानी रखी जाएगी।


चिल्ला एलिवेटेड रोड और सेक्टर-62 स्काईवॉक का काम होगा प्रभावित

नोएडा में चल रही प्रमुख विकास परियोजनाओं में चिल्ला एलिवेटेड रोड का निर्माण भी शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य फिल्म सिटी मार्ग पर लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाना है। निर्माण कार्यों पर पाबंदी के कारण इस परियोजना की रफ्तार प्रभावित होने की आशंका है। इसी तरह सेक्टर-62 गोलचक्कर पर बनाए जा रहे स्काईवॉक का काम भी प्रभावित होगा। स्काईवॉक का निर्माण पूरा होने के बाद पैदल यात्रियों को सड़क पार करने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा सलारपुर में नाले पर दो पुलों का निर्माण कराया जा रहा है। इन पुलों का काम भी प्रतिबंध के दायरे में आने की संभावना है। पहले से चल रही परियोजनाओं में निर्माण रुकने से निर्धारित समयसीमा प्रभावित हो सकती है और लोगों को इन सुविधाओं का लाभ मिलने के लिए अधिक इंतजार करना पड़ सकता है।


यमुना तटबंध, जापानी पार्क और सड़कों की मरम्मत पर भी असर

निर्माण कार्यों पर रोक का असर केवल सड़क और पुल परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा। यमुना तटबंध की मरम्मत का काम भी प्रभावित होने वाली परियोजनाओं में शामिल है। इसके अलावा सेक्टर-94 में जापानी पार्क विकसित किया जा रहा है, जहां निर्माण संबंधी गतिविधियों पर पाबंदी का असर पड़ सकता है। सेक्टर-62 स्थित डी-पार्क के सुंदरीकरण का काम भी इस अवधि में प्रभावित होगा। शहर की टूटी और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत भी रोक के दायरे में आएगी। इससे जिन क्षेत्रों में सड़क सुधार का काम चल रहा है, वहां लोगों को कुछ समय और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाना है, लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए गए प्रतिबंधों के कारण काम की गति धीमी पड़ सकती है।


खुदाई और धूल फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर रहेगी सख्ती

नोएडा प्राधिकरण के महाप्रबंधक एसपी सिंह के मुताबिक, शहर में कई विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इनमें अधिकांश स्थानों पर खुदाई से संबंधित गतिविधियां की जा रही हैं। ऐसी गतिविधियों के दौरान धूल उड़ने से वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए प्रदूषण फैलाने वाले निर्माण कार्यों पर सख्ती बरती जाएगी। उन्होंने बताया कि निर्माण स्थलों पर जारी निर्देशों का पालन कराया जाएगा और धूल तथा धुआं फैलाने वाले काम नहीं होने दिए जाएंगे। प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों को निर्माण स्थलों पर निगरानी रखने की जिम्मेदारी दी गई है। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रतिबंधित गतिविधियां संचालित न हों। प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए इन कदमों का असर शहर की निर्माणाधीन परियोजनाओं की प्रगति पर पड़ सकता है।


नवंबर के बाद भी बढ़ सकती है परियोजनाओं की समयसीमा

निर्माण कार्यों पर फिलहाल 20 नवंबर तक रोक लगाए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, इसके बाद भी परियोजनाओं का काम सामान्य गति से शुरू हो पाएगा या नहीं, यह प्रदूषण की स्थिति और आगे जारी होने वाले निर्देशों पर निर्भर करेगा। सर्दियों के दौरान नोएडा और आसपास के क्षेत्रों में वायु प्रदूषण बढ़ने की आशंका बनी रहती है। ऐसे में प्रदूषण का स्तर अधिक होने पर निर्माण गतिविधियों पर दोबारा प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि जनवरी तक बीच-बीच में ऐसी बंदिशों का सामना करना पड़ सकता है। यदि ऐसा होता है तो पहले से देरी से चल रही परियोजनाओं को पूरा करने में और समय लग सकता है। फिलहाल नोएडा प्राधिकरण के सामने प्रदूषण नियंत्रण के निर्देशों का पालन कराने के साथ विकास कार्यों की समयसीमा को संभालने की चुनौती है।

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